भोपाल। हमीदिया अस्पताल की आइसीयू में सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक ड्यूटी पर खड़ी नर्स जया बरई की पानी की बोतल टेबल पर रखी है। 12 घंटे में शायद ही उसे खोलने का मौका मिले। मेडिकल इमरजेंसी में 12 घंटे ड्यूटी करते हैं, पानी पीने की ड्यूटी आती है तब याद आता है कि बोतल रखी है। पानी पीने का समय ही नहीं मिलता, जया की आवाज में थकान साफ सुनाई देती है।
यह सिर्फ जया की कहानी नहीं है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 2000 के करीब नर्सें हैं, लेकिन मरीजों की संख्या के सामने ये संख्या नाकाफी है। नियम कहता है कि जनरल वार्ड में 10 मरीजों पर एक नर्स होनी चाहिए। आइसीयू में अगर मरीज कोमा में है तो एक मरीज पर एक नर्स, और होश में है तो दो मरीजों पर एक नर्स। लेकिन हकीकत यह है कि यहां एक नर्स के कंधे पर 30-30 मरीजों की जिम्मेदारी है।