JDU ने आखिरी वक्त में बीजेपी के पाले में सीएम की गेंद फेंकी, जानिए नीतीश के दांव की असल कहानी
Updated on
13-04-2026 12:35 PM
पटना: बिहार की राजनीति में रविवार को सीएम नीतीश कुमार के करीबी मंत्री विजय कुमार चौधरी के बयान की एक लाइन में कई इशारे छिपे हुए हैं। विजय चौधरी वैसे भी नीतीश के सबसे करीबी मंत्री माने जाते हैं। सरकार चाहे महागठबंधन की रही हो या फिर NDA की, विजय चौधरी उन चुनिंदा नेताओं में से हैं, जो हमेशा नीतीश कुमार की कैबिनेट में मंत्री रहे। ऐसे में उनका कुछ कहना सिर्फ कुछ कह देना नहीं है। उसे मायने भी बड़े हैं।
विजय चौधरी ने क्यों कहा- बीजेपी को चुनना है?
विजय चौधरी जब रविवार को सीएम आवास से बाहर आए तो उन्होंने नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में होने की बात कही। लेकिन साथ में एक लाइन ये भी कि बीजेपी नए सीएम के नाम की अनुशंसा करेगी। सीधी बात कि JDU का इसमें कोई रोल नहीं है, मुख्यमंत्री बीजेपी को चुनना है तो फैसला वही करे। लेकिन उसके बाद उन्होंने ये भी साफ कहा कि NDA का विधायक दल बीजेपी की अनुशंसा के बाद अपना नेता चुनेगा।
JDU ने बीजेपी के पाले में क्यों डाली गेंद?
विजय चौधरी की बात को समझिए। उनका इशारा साफ था कि सीएम कैंडिडेट बीजेपी चुनेगी और उसमें NDA विधायक दल यानी JDU की सहमति लेनी जरूरी होगी और ये फैसला बैठक में ही होगा। अभी तक जो चर्चा चल रही थी कि सम्राट चौधरी सीएम नीतीश की पसंद हैं और वो उन्हें ही अगला सीएम देखना चाहते हैं, इस चर्चा पर विजय कुमार चौधरी ने एक झटके में फुल स्टॉप लगा दिया। लेकिन ये भी एक सच है कि बगैर नीतीश की मर्जी के विजय चौधरी कुछ भी नहीं कहेंगे, ये सब जानते हैं। तो फिर JDU ने बीजेपी के पाले में मुख्यमंत्री चुनने की गेंद क्यों डाल दी?
'नीतीश अपने माथे बदनामी कभी नहीं लेते'
इसको समझने के लिए आपको थोड़ा सा ही सही लेकिन पीछे जाना होगा। नीतीश कुमार राजनीति में परिवारवाद के सबसे बड़े विरोधी रहे हैं, लेकिन उनके बेटे निशांत कुमार अब जदयू में आकर राजनीति संभाल रहे हैं। लेकिन उनके जदयू में आने की बात से लेकर शामिल होने तक नीतीश कहीं भी निशांत के साथ नहीं दिखे। यही नीतीश कुमार की यूएसपी है, बेमन का काम वो करते नहीं और मन का होता भी है तो वो उसे दिखाते नहीं, भले ही आप लाख सवाल पूछते रहिए।
'बीजेपी के पाले में इसलिए डाली गई गेंद'
बिहार में नीतीश कुमार ने विकास की जो लकीर खींच दी है, उसके लिए उनके विरोधी भी उनकी तारीफ करते हैं। गठबंधन बदले तो बदले लेकिन नीतियां न छूटें, यही नीतीश के बारे में कहा जाता है। जाहिर है कि बिहार के अगले सीएम को नीतीश कुमार से लंबी लकीर खींचनी होगी। उसके लिए उसे व्यक्तिगत तौर पर भी नीतीश कुमार जैसा होना होगा। अगर नीतीश अपनी पसंद को बीजेपी के सामने रखते हैं और नया सीएम वैसा न कर पाए जिसकी उम्मीद लगाई जा रही है तो उसका ठीकरा नीतीश पर ही फूटेगा।
'चित भी मेरी, पट भी मेरा'
ऐसे में नीतीश नहीं चाहते कि सत्ता हाथ से जाने के बाद उनके हिस्से में रत्ती भर भी बदनामी आए। NDA के एक सूत्र ने बताया कि नीतीश कुमार इसीलिए बीजेपी पर अपनी पसंद थोपना नहीं चाहते। वो चाहते हैं कि बीजेपी खुद फैसला करे। इसके बाद अगर आगे बिहार के लिए नए मुख्यमंत्री कुछ अच्छा करते हैं तो ये कहा जा सकता है कि सरकार नीतीश की नीतियों पर चल रही है। अगर कुछ गड़बड़ हुई तो इसकी जिम्मेवारी नीतीश की नहीं होगी, क्योंकि सीएम तो बीजेपी ने चुना है। लब्बोलुआब साफ- 'चित भी मेरी और पट भी मेरा'।
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