भोपाल। मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों पर पात्रता की तलवार लटक रही है। इनमें वे शिक्षक शामिल हैं, जिनकी नियुक्तियां 2005 के पहले हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा की गुणवत्ता के लिए पात्रता परीक्षा लेने के निर्देश दिए हैं, जिसका शिक्षक विरोध कर रहे हैं।
इन शिक्षकों का कहना है कि जब जो प्रविधान थे, उसके अनुरूप हमारी भर्ती हुई तो फिर हम परीक्षा क्यों दें। इस मामले पर प्रदेश में सियासत भी होने लगी है।
होशंगाबाद सीट से भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी और पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार शिक्षकों की भावना के साथ जुड़े हैं तो कांग्रेस इसे मुद्दा बनाने में जुट गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार स्पष्ट कर चुके हैं कि पात्रता परीक्षा शिक्षकों के साथ अन्याय है।