नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ( EPFO ) ने सहारा इंडिया की विभिन्न इकाइयों के खिलाफ भविष्य निधि (PF) के बकाया भुगतान को लेकर सख्त रुख अपनाया है। ईपीएफओ ने सहारा से 1204 करोड़ रुपये की राशि वसूलने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईपीएफओ के लखनऊ कार्यालय ने सोमवार को बताया कि सहारा इंडिया के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों में कई रिकवरी सर्टिफिकेट (RC) जारी किए गए थे। ये सर्टिफिकेट अप्रैल 2021 से अप्रैल 2023 के बीच सहारा की उन विभिन्न इकाइयों के खिलाफ जारी किए गए थे, जो ईपीएफ (EPF) अधिनियम के तहत आती हैं।
₹1179 करोड़ का सबसे बड़ा दावा
रिकवरी के विवरण के अनुसार, इसमें चार बड़े दावे शामिल हैं। ये इस प्रकार हैं:
सबसे बड़ा दावा 1,179 करोड़ रुपये से अधिक का है।
अन्य दावे 31 लाख रुपये से लेकर 23 करोड़ रुपये के बीच हैं।
कुर्की और नीलामी के आदेश
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ईपीएफओ कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा और सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement Benefits) की रक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है। रिकवरी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सहारा इंडिया की लखनऊ स्थित चल और अचल संपत्तियों को कुर्क करने और उनकी बिक्री करने जैसे कड़े कदम उठाएं।
कर्मचारियों के हित में फैसला
EPF अधिनियम की धारा 11(2) के तहत, कर्मचारियों की पीएफ राशि पर पहला अधिकार उन्हीं का होता है। इसका मतलब है कि सहारा इंडिया की किसी भी संपत्ति की बिक्री या नीलामी से मिलने वाली राशि का उपयोग सबसे पहले कर्मचारियों के बकाया भुगतान के लिए किया जाएगा। ईपीएफओ की इस कार्रवाई से उन हजारों कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनका पीएफ का पैसा सहारा इंडिया के पास वर्षों से लंबित है।
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