ईरान युद्ध से पहले फ्रांस ने अमेरिका से निकाल लिया अपना सारा सोना, जान लीजिए वजह
Updated on
07-04-2026 12:34 PM
नई दिल्ली: ईरान युद्ध शुरू होने से पहले सोने की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 5,600 डॉलर प्रति औंस के पीक पर पहुंचा था। फ्रांस ने इसका फायदा उठाते हुए अमेरिका में रखा अपना सारा सोना बेच दिया और यूरोप में अपनी होल्डिंग फिर से बनाई है। फ्रांस लंबे समय से अपना सोना न्यूयॉर्क में फेडरल रिजर्व बैंक में रखा करता था। लेकिन फ्रांस के सेंट्रल बैंक ने जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच वहां रखा सारा सोना बेच दिया। इससे उसके करीब 14.7 अरब डॉलर का फायदा हुआ।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रांस ने सोने की बिक्री ऐसे समय की जब यह पीक पर था। इसकी कीमत 5600 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रही थी। फ्रांस के सेंट्रल बैंक ने करीब सात महीनों के दौरान 26 किस्तों में अमेरिका में रखे सोने की बिक्री की। इससे उसकी वित्तीय स्थिति भी सुधर गई। 2024 में उसके 8.8 अरब डॉलर का घाटा हुआ था जबकि 2025 में इसके 9.3 अरब डॉलर का फायदा हुआ है।
क्यों बेचा सोना?
फ्रांस के अधिकारियों ने इसे टेक्निकल अपग्रेड बताया है। सेंट्रल बैंक के गवर्नर फ्रांस्वा विलेरॉय डी गाल्हू ने कहा कि पुराने नॉन-स्टैंडर्ड गोल्ड बार को मौजूदा इंटरनेशनल स्पेसिफिकेशन वाले बुलियन में बदला जा रहा है और यह इसी प्रयास का हिस्सा है। सोने को अमेरिका से फ्रांस लाने के बजाय उसे वहीं बेच दिया गया और इसके बदले यूरोप में हायर ग्रेड के बार खरीदे गए। इससे लॉजिस्टिक्स कॉस्ट की बचत हुई।
फ्रांस के सेंट्रल बैंक ने इस मूव को भले ही इसे ऑपरेशनल मूव बताया है लेकिन इसे 1960 के दशक से जोड़कर देखा जा रहा है। तब चार्ल्स डी गॉल के कार्यकाल में देश में मॉनीटरी इंडिपेंडेंस के लिए मुहिम चलाई गई थी। उस जमाने में विदेशों में जमा सोने के देश में लाया गया था। हालांकि जर्मनी और इटली ने अब भी अमेरिका में सोना रखा हुआ है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक 59 फीसदी सेंट्रल बैंक देश में ही सोना रखना पसंद करते हैं। 2024 में यह आंकड़ा 41 फीसदी था।
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