टैरिफ कम कराने पर देना चाहिए जोर
राजन ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को चल रही बातचीत के दौरान टैरिफ कम कराने के लिए जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए यह बेहद जरूरी है कि हमारे टैरिफ जल्दी कम किए जाएं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां हमारे श्रम-प्रधान उद्योग हैं जिन्होंने अमेरिका में कुछ हद तक अपनी जगह बनाई है।'एच-1बी वीजा फीस बढ़ोतरी के बारे में राजन ने कहा कि इसका कुल असर जितना सोचा जा रहा था, उससे कम गंभीर हो सकता है। उन्होंने कहा, 'समय के साथ भारतीय कंपनियों के लिए एच-1बी वीजा की जरूरत कम हो रही है क्योंकि अब बहुत सारा काम वर्चुअल नेटवर्क के जरिए किया जा सकता है, न कि व्यक्तिगत रूप से वहां जाकर।' उन्होंने कहा, 'एच-1बी से ज्यादा यह सवाल है कि क्या इस आउटसोर्सिंग पर टैरिफ लगेगा। यह एक बड़ी चिंता होगी।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा एच-1बी वीजाधारकों और STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) ग्रेजुएट्स को नई फीस का सामना नहीं करना पड़ेगा। कंपनियां अलग तरह से भर्ती करके एडजस्ट कर सकती हैं। राजन ने कहा, 'भारतीय कंपनियां अभी भी अमेरिका में अपने कर्मचारी रख सकती हैं। वे अमेरिका में डिग्री हासिल करने वाले भारतीय छात्रों की ज्यादा भर्ती कर सकती हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन अंत में यह हो सकता है कि भारतीय कंपनियां तय करें कि उन्हें किसी को वहां भेजने की जरूरत नहीं है। वे वहां कुछ लोगों को काम पर रख सकती हैं। लेकिन, ज्यादातर काम वर्चुअल तरीके से करेंगी।'


