क्या जदयू में संग्राम की वजह बन रही BJP की 'वक्र दृष्टि'? नीतीश भी अपनों पर नाराज, जानिए JDU में क्या चल रहा
Updated on
13-07-2026 01:26 PM
पटना: बिहार में जबसे जदयू का भीतरी संग्राम मीडिया के कैमरे में कैद होने लगा है, राजनीतिक गलियारों में बीजेपी की उस 'बक्र दृष्टि' की चर्चा होने लगी है, जो वर्ष 2025 विधानसभा से पहले पड़ने लगी थी। हालांकि तब बीजेपी के 89 विधायकों के बरक्स जदयू के 85 विधायकों का चुनकर आने से बीजेपी की उम्मीद पर पानी फिर गया। लेकिन जब से नीतीश कुमार के हाथ से मुख्यमंत्री की कुर्सी गई और स्वास्थ भी उनका साथ नहीं दे रहा है, जदयू से धीरे-धीरे नीतीश कुमार का प्रभाव कम होता जा रहा है। इस प्रभाहीनता का असर जदयू के कद्दावर नेताओं पर भी दिखने लगा है। टुकड़ों-टुकड़ों में बंटे जदयू के भीतर क्या कुछ चल रहा है, जानिए...
याद कीजिए जे पी नड्डा का बयान
बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक जनसभा को संबोधित करते कहा था कि एक दिन देश से सभी क्षेत्रीय पार्टियां खत्म हो जाएंगी और केवल भारतीय जनता पार्टी ही बचेगी। ऐसा इसलिए कि बीजेपी सिद्धांतों पर चलती है। अगर पार्टी इसी तरह काम करती रही, तो वंशवाद और परिवारवाद वाली क्षेत्रीय पार्टियां धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगी। रही कांग्रेस तो, यह दल 40 साल भी लगाकर हमारे बराबर नहीं खड़ी हो सकती है। हम जिस तरह की पार्टी हैं, वो दो दिनों में नहीं बनती है। हमारी पार्टी की विचारधारा इतनी मजबूत है कि लोग 20 साल दूसरी पार्टियों में रहकर हमारी पार्टी में आ रहे हैं।
जदयू में कितने कितने गुट?
मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार अपने पद से क्या हटे, जदयू के भीतर गुटबाजी चरम पर पहुंच गई। याद कीजिए जब यह केवल यह बात सामने आई कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। अगला मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा। इसके बाद जदयू के भीतर हंगामा खड़ा हो गया। पार्टी फॉरवर्ड और बैकवर्ड के लाइन पर बंटते दिखी। जदयू कार्यालय के भीतर संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के विरुद्ध नारेबाजी शुरू हो गई।
पिछले दिनों छोटू सिंह पर कार्रवाई हुई। पार्टी के भीतर संजय झा और ललन सिंह दो सिरों पर खड़े दिखे। जदयू के भीतर सवर्ण नेताओं के प्रति नाराजगी को लेकर पिछड़े वर्ग के कई नेताओं ने आरसीपी सिंह को पार्टी में शामिल कराने की न केवल मांग की, बल्कि एक दिन तो उनके सरकारी आवास पर भी ले आ गया
पर नाराज संजय गांधी और ललन शराफ का नाम इस संदर्भ में सामने आया कि इन लोगों ने आरसीपी सिंह को मिलने नहीं दिया। इस बहाने जदयू के भीतर तीसरा गुट सामने आया। उप मुख्यमंत्री विजय चौधरी अपना अलग गुट बनाए हुए हैं। श्रवण कुमार की नाराजगी उस वक्त उजागर हुई, जब पार्टी ने उप मुख्यमंत्री के लिए विजय चौधरी और विजेंद्र यादव का नाम फाइनल किया।
संगठन विस्तार या खुद जदयू की कब्र
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का संगठन विस्तार भी इस बार कई सवालों के घेरे में रहा। आरोप यह लगा कि केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह के आदमियों को इग्नोर किया गया। इस नई टीम के गठन के बाद कई पुराने और सक्रिय नेताओं को जगह नहीं मिली। इसके बाद उठे असंतोष और बगावती सुरों के कारण पार्टी ने कई नेताओं जैसे छोटू सिंह पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हुई। संगठन में पदों के बंटवारे और नई नियुक्तियों को लेकर कई बार अंदरूनी कलह सामने आई है।
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