प्रायोरिटी सेक्टर लोन
इंडस्ट्री क्रेडिट 10% बढ़कर 41.93 लाख करोड़ रुपये हो गए। इसमें छोटे और बहुत छोटे उद्योगों को दिए जाने वाले लोन में 25.9% की भारी बढ़ोतरी हुई, जो 9.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मझोले उद्योगों को 17.6% ज्यादा लोन मिला, जो 3.98 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं, बड़ी कंपनियों को सिर्फ 4.6% ज्यादा लोन मिला, जो 28.41 लाख करोड़ रुपये है। इससे लगता है कि बड़ी कंपनियां बैंक से लोन लेने के बजाय बॉन्ड, शेयर या विदेशी कंपनियों से सीधे लोन ले रही हैं, जो बैंक के आंकड़ों में नहीं दिखता। खेती-किसानी और उससे जुड़े कामों के लिए लोन 8.9% बढ़कर 24.03 लाख करोड़ रुपये हो गया।प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में रिन्यूएबल एनर्जी के लिए लोन 52.1% बढ़ा है। प्राथमिकता वाले हाउसिंग लोन 32.7% बढ़े हैं और माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज को दिए जाने वाले लोन 25.8% बढ़े हैं। सोशल-इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए लोन कम हुआ है और एक्सपोर्ट क्रेडिट में भी कमी आई है।


