'VC बनने के बाद नींद-चैन दोनों उड़े', बीयू के 'शिक्षा संवाद' में उच्च शिक्षा मंत्री के सामने भावुक हुए कार्यवाहक कुलपति
Updated on
04-07-2026 12:26 PM
भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में शुक्रवार को आयोजित 'शिक्षा संवाद' कार्यक्रम में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कार्यवाहक कुलपति प्रो. विवेक शर्मा से उनका हालचाल पूछा।
इस पर प्रो. शर्मा ने बेबाकी से जवाब देते हुए कहा, "हाल नहीं, बेहाल है। पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय की जो स्थिति हुई है, उसे सुधारने का प्रयास कर रहा हूं। यह जिम्मेदारी आपने मुझे सौंपी है, इसलिए पूरी निष्ठा से काम कर रहा हूं।"
उन्होंने आगे कहा, "लोग जब मेरा हाल पूछते हैं तो मैं यही कहता हूं कि हाल नहीं, बेहाल है। कुलपति बनने से पहले जो चैन की नींद आती थी, वह अब छिन गई है। कुलपति बनने के बाद नींद और चैन दोनों ही नहीं रहे।"
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में आयोजित 'शिक्षा संवाद' कार्यक्रम समस्याओं और सुझावों का बड़ा मंच बनकर सामने आया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने वर्षों से लंबित समस्याओं और सुधार संबंधी सुझावों को खुलकर रखा।
कार्यक्रम के दौरान सबसे अधिक चर्चा कार्यवाहक कुलपति प्रो. विवेक शर्मा के इस बयान की रही, जिसे विश्वविद्यालय की मौजूदा चुनौतियों और व्यवस्थागत दबाव का स्पष्ट संकेत माना गया।
लंबित परीक्षा परिणामों में आई कमी, संबद्धता में देरी स्वीकारी
कुलपति प्रो. विवेक शर्मा ने विवि के कामकाज का ब्योरा देते हुए बताया कि जब उन्होंने कार्यभार संभाला था, तब विश्वविद्यालय में 258 परीक्षाओं के परिणाम लंबित (पेंडिंग) थे। कड़े प्रयासों के बाद अब इन्हें घटाकर 162 कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने कॉलेजों की संबद्धता जारी करने के मामले में हो रही देरी की बात को भी स्वीकार किया।
उच्च शिक्षा मंत्री के बड़े निर्देश और घोषणाएं
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विवि प्रशासन को सभी रिक्त पदों पर तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार इस कार्य में हर जरूरी सहयोग प्रदान करेगी। इसके साथ ही मंत्री परमार ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को सरकारी नौकरियों में वेटेज (अतिरिक्त अंक या प्राथमिकता) देने का एक प्रस्ताव जल्द ही मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा।
ईसी मेंबर के सुझाव पर बोले कुलपति- 'मेरा ही भविष्य तय नहीं'
संवाद के दौरान कार्यपरिषद की नॉमिनी सदस्य डॉ. भारती सातनकर ने हॉस्टल में असामाजिक तत्वों की सक्रियता पर कार्रवाई करने और साल में कम से कम दो कार्यपरिषद बैठकें पूरी तरह छात्रों पर केंद्रित रखने का सुझाव दिया। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने उन्हें यह बात लिखित में देने को कहा।
वहीं, इस सुझाव पर प्रतिक्रिया देते हुए कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा, "छात्रों के लिए मैं हमेशा उपलब्ध हूं। लेकिन ईसी की कितनी बैठकें होंगी, मुझे नहीं मालूम। मैं सिर्फ एक कार्यवाहक कुलपति हूं, मेरा खुद का ही भविष्य तय नहीं है कि मैं यहाँ कब तक हूँ।"
शोधार्थियों ने उठाईं फंडिंग से लेकर कैंटीन तक की समस्याएं
शिक्षा संवाद में शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भी विवि की अव्यवस्थाओं को लेकर अपनी आवाज उठाई:
प्रशासनिक व्यस्तता: शोधार्थियों का आरोप था कि उनके शोध निर्देशक (गाइड) प्रशासनिक कार्यों में अत्यधिक व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण वे शोध के लिए पर्याप्त समय नहीं दे पाते। इससे रिसर्च की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
लाइब्रेरी में नई किताबों की कमी: छात्रों ने कहा कि सेंट्रल लाइब्रेरी में किताबें तो हैं, लेकिन आधुनिक शोध और अध्ययन के लिए जरूरी नई व उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं।
बुनियादी सुविधाएं: परिसर में फंडिंग की कमी और विवि में कैंटीन न होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एसबी सिंह, कार्यपरिषद सदस्य, शिक्षक, कर्मचारी, शोधार्थी, विद्यार्थी और एबीवीपी के पदाधिकारी मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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