महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव : एमवीए की एक सीट के लिए उद्धव ठाकरे का रास्ता साफ
Updated on
06-04-2026 05:15 PM
मुंबई : बारामती में डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के खिलाफ कैंडिडेट उतारकर कांग्रेस ने विधान परिषद के लिए उद्धव ठाकरे का रास्ता साफ कर दिया है। शरद पवार पहले ही राज्यसभा के बदले विधान परिषद में सीनियर ठाकरे को समर्थन देने का वादा कर चुके हैं। सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी ठाकरे के खिलाफ नर्म रुख अपनाने का संकेत दिया है। चूंकि कांग्रेस ने पवार फैमिली के आग्रह के बाद भी बारामती से विश्वनाथ मोरे को उतार दिया, इसके बाद यह माना जा रहा है कि शरद पवार विधान परिषद के लिए कांग्रेस की दावेदारी से सहमत नहीं होंगे। अगर उन्होंने कांग्रेस को समर्थन दिया तो एनसीपी और पवार परिवार में एकजुटता के लिए शुरू हुई प्रक्रिया अटक सकती है।
राज्यसभा चुनाव के दौरान ही तय थी यूबीटी की दावेदारी
मई में महाराष्ट्र विधान परिषद की 9 सीटें रिक्त होने वाली है। विधानसभा में एनडीए को बहुमत हासिल है, इसलिए 8 सीटें सीधे तौर पर महायुति के खाते में जाना तय है। आंकड़ों के हिसाब से बीजेपी के 6, शिंदे सेना और अजित गुट एनसीपी के एक-एक उम्मीदवार विधान परिषद जाएंगे। एक सीट पर महाविकास अघाड़ी के खाते में जाएगी। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि बजट सत्र के दौरान उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर विधानसभा जाने की मंशा जाहिर की थी। शिवसेना यूबीटी ने राज्यसभा की एक सीट पर भी दावेदारी की थी, मगर शरद पवार का नाम सामने आने के बाद वह पीछे हट गए। सूत्रों के अनुसार, तब शिवसेना यूबीटी ने विधान परिषद की एकमात्र सीट पर समझौता किया था। कांग्रेस ने भी इस पर दावा ठोंका है, मगर शरद पवार ने ऐलान किया था कि भविष्य में अगर उद्धव ठाकरे एमवीए कैंडिडेट बने या किसी को उम्मीदवार बनाया तो वह समर्थन करेंगे।
बारामती से कैंडिडेट उतारकर कांग्रेस ने मंशा साफ की
इस बीच एक बार फिर एनसीपी में एकजुटती की चर्चा शुरू हुई। जय पवार और सुनेत्रा पवार ने एनसीपी अजित गुट की कमान अपने हाथ में ले ली। बताया जा रहा है कि नए स्तर पर चर्चा शुरू करने से पहले विलय का विरोध कर रहे प्रफुल्ल पटेल जैसे नेताओं को भी शांत करा दिया। ऐसी स्थिति में शरद पवार गुट ऐसी कोई स्थिति नहीं चाहता है, जिससे विलय की प्रक्रिया विवाद में फंसे। कांग्रेस ने अपील के बावजूद बारामती सीट से कैंडिडेट उतार दिया। अब अगर भविष्य में कांग्रेस विधान परिषद के लिए कैंडिडेट उतारती है तो शरद पवार के लिए समर्थन करना आसान नहीं होगा। चूंकि बीजेपी के नेता देवेंद्र फड़णवीस भी उद्धव ठाकरे के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखते हैं इसलिए यूबीटी की दावेदारी संकटविहीन हो जाएगी।
जानिए क्या है विधान परिषद चुनाव का समीकरण
महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी के 132, शिवसेना (शिंदे गुट) के 57 और एनसीपी (अजित पवार गुट) के 40 विधायक हैं। अजित पवार के निधन के कारण बारामती की सीट खाली है। इसके अलावा छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों को मिलाकर महायुति के पास लगभग 235 विधायकों का समर्थन है। वहीं विपक्षी उद्धव सेना के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (शरद गुट ) के 10 विधायकों के साथ सपा 2 और एमआईएम को मिलाकर विपक्ष की कुल संख्या करीब 50 तक पहुंचती है। जबकि 1 अन्य सहित 1 निर्दलीय विधायक हैं। विधान परिषद में पहुंचने के लिए एक उम्मीदवार को कम से कम 29 वोटों की आवश्यकता होगी। ठाकरे को दोबारा विधान परिषद पहुंचने के लिए कांग्रेस के 16 विधायक और एनसीपी (एसपी) के 10 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।
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