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MP में नगर निगमों की खस्ता हालत, बिजली के बिल भरने तक के पैसे नहीं, चुंगी क्षतिपूर्ति से चुकता किए 106 करोड़ रुपये

Updated on 02-04-2026 11:57 AM

भोपाल। प्रदेश के नगरीय निकायों की वित्तीय हालत बेहद खराब है। हालात ऐसे हैं कि अधिकतर निकाय बिजली का बिल तक नहीं चुका पा रहे हैं। एक दिन पहले सागर के शाहगढ़ नगर पालिका कार्यालय का बिजली कनेक्शन काट दिया गया। इस हाल में नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 217 नगरीय निकायों के बिजली बिलों का एकमुश्त भुगतान किया है। यह रकम 106 करोड़ रुपये की थी जिसकी वजह से बिजली कंपनियों पर दबाव बढ़ा था।

नगरीय निकायों पर 25 मार्च 2026 तक बकाया बिजली देयकों का निपटारा करने के लिए माह मार्च 2026 की चुंगी क्षतिपूर्ति की 106 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग किया गया है। इसमें सबसे अधिक इंदौर नगर निगम का 26 करोड़ और दूसरे नंबर पर भोपाल नगर निगम के बिजली बिल की बकाया 13 करोड़ रुपये राशि का भुगतान किया गया है। इसके अलावा ग्वालियर की 9.34 करोड़, जबलपुर की 6.22 करोड़ रुपये की राशि भी विद्युत कंपनियों के खाते में ट्रांसफर कर दी है।

नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, 25 मार्च 2026 की स्थिति में निकायों पर भारी बकाया दिख रहा था। इस वित्तीय भार को उठाने में भोपाल, इंदौर जैसे संसाधनों वाले नगर निगमों ने हाथ खड़े कर लिए थे। इस वित्तीय बोझ को कम करने के लिए विभाग ने निकायों के हिस्से की राशि काटकर तीन प्रमुख विद्युत वितरण कंपनियों को भुगतान किया है। विंध्याचल कोषालय के माध्यम से मध्य क्षेत्र कंपनी को 40.75 करोड़, पूर्व क्षेत्र कंपनी को 24.55 करोड़ और पश्चिम क्षेत्र कंपनी को 41.29 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

केवल बकाया कनेक्शनों में होगा समायोजन

नगरीय प्राशासन एवं विकास संचालनालय ने सख्त निर्देश दिए हैं कि आवंटित राशि का समायोजन केवल उन्हीं कनेक्शनों के विरुद्ध किया जाए, जिनमें बकाया राशि अधिक है। निकायों को यह भी ताकीद की गई है कि वे स्थानीय विद्युत वितरण केंद्रों से समन्वय कर समायोजन की सूचना तत्काल संचालनालय को भिजवा दें।

क्या थी यह चुंगी, जिसे अब सरकार देती है

1998-99 तक यह नगर सीमा में किसी भी व्यापारिक माल के प्रवेश पर लगने वाला स्थानीय कर था। यह नगरीय निकायों की आय का प्रमुख स्रोत था। भोपाल जैसे शहर में सालाना 100-130 करोड़ की आय चुंगी से होती थी। समेकित कर प्रणाली वैट, जीएसटी युग में इसे खत्म कर दिया गया। कर नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार चुंगी क्षतिपूर्ति देती है। यह सालाना करीब 440 से 500 करोड़ रुपये है।



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