काफी समय से कोशिशों में लगी है सरकार
सरकार ने बड़े बैंक बनाने के अपने प्रयासों के तहत पहले भी दो बार बैंकों का एकीकरण किया है। बैंकिंग क्षेत्र में सबसे बड़े एकीकरण के तहत सरकार ने अगस्त 2019 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के चार बड़े विलय की घोषणा की थी। इसके चलते बैंकों की कुल संख्या घटकर 12 रह गई, जो 2017 में 27 थी। 1 अप्रैल 2020 से यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स का पंजाब नेशनल बैंक में विलय कर दिया गया। इसी तरह सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में और इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक में विलय हुआ। इसके अलावा, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक का यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में विलय किया गया।इससे पहले, 2019 में देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय हुआ था। उसके पूर्व सरकार ने एसबीआई के पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का भारतीय स्टेट बैंक में विलय किया था। यह कदम अप्रैल 2017 में एसबीआई को और बड़ा बनाने के इरादे से उठाया गया था।
निजीकरण की प्रक्रिया के तहत सरकार ने जनवरी 2019 में आईडीबीआई बैंक में अपनी 51 फीसदी नियंत्रक हिस्सेदारी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को बेच दी थी। इसके बाद सरकार और एलआईसी ने आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री की योजना की घोषणा की। वर्तमान में आईडीबीआई में हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया जारी है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने यह भी बताया कि सरकार का मुख्य ध्यान बुनियादी ढांचे के निर्माण पर है। उन्होंने कहा कि पिछले दशक में पूंजीगत व्यय में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। राजकोषीय सूझबूझ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर आत्मनिर्भरता के सिद्धांत का पालन कर रही है कि राजकोषीय अनुशासन कभी खतरे में न पड़े।


