पेट्रोलियम, पावर, कोल... ईरान युद्ध से भारत सरकार का 75,000 करोड़ रुपये का डिविडेंड खतरे में?
Updated on
13-04-2026 01:19 PM
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत नाकाम होने के बाद अब सीजफायर खतरे में पड़ गया है। अमेरिका की नेवी होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी की तैयारी कर रही है जबकि ईरान का कहना है कि ऐसा करना सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा। इससे ईरान युद्ध के लंबा खिंचने की आंशका पैदा हो गई है। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो इससे दुनिया में कमोडिटीज की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। इससे सरकारी कंपनियों के प्रॉफिट पर असर हो सकता है। सरकार ने इस फाइनेंशियल ईयर में डिविडेंड और दूसरे निवेश से 75,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन ईटी की एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इसे पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
कच्चे तेल की कीमत में तेजी से सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों का मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हो सकता है। ईरान युद्ध के बाद से कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है और 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में पीएसयू और दूसरे माध्यमों से 78,438 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला था। इसमें तेल कंपनियों की करीब एक तिहाई हिस्सेदारी है। यह लगातार पांचवां साल था जब डिविडेंड कलेक्शन बजट अनुमान से बेहतर रहा था।
प्रॉफिट पर असर
फाइनेंस मिनिस्ट्री के एक अधिकारी ने कहा कि सीजफायर कभी भी टूट सकता है। अगर ऐसा होता है तो लड़ाई लंबी खिंच सकती है और इससे तेल तथा दूसरे कच्चे माल की कीमत में और तेजी आएगी। इससे पीएसयू के प्रॉफिट पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर अगर युद्ध जल्दी खत्म हो जाता है तो इससे पीएसयू के मुनाफे पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ब्लूमबर्ग कमोडिटी इंडेक्स 28 फरवरी को ईरान में लड़ाई शुरू होने के बाद 9 फीसदी उछल चुका है। यह इंडेक्स 29 आइटम्स की कीमतों पर नजर रखता है।
अधिकारी ने कहा कि सरकार अभी 2026-27 का डिविडेंड टारगेट नहीं बदलना चाहती है क्योंकि ऐसा करना जल्दबाजी होगी। अगर लड़ाई जारी रहती है तो दूसरी छमाही में वह आंतरिक तौर इसकी समीक्षा कर सकती है। पिछले साल पेट्रोलियम कंपनियों ने सरकार को 25,798 करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया था। पावर सेक्टर की कंपनियों ने 13,213 करोड़ और कोयला कंपनियों ने 10,876 करोड़ रुपये का लाभांश दिया था। पिछले साल सरकार को मिले कुल डिविडेंड में इन तीन सेक्टर्स की हिस्सेदारी 64 फीसदी थी।
एक्साइज ड्यूटी में कटौती
27 मार्च को सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। इसका मकसद उपभोक्ताओं और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को तेल की महंगाई से बचाना था। पिछले वित्त वर्ष में सरकार को डिसइनवेस्टमेंट और एसेट मॉनेटाइजेशन से 45,306 करोड़ रुपये मिले थे जो 33,847 करोड़ रुपये के संशोधित लक्ष्य से अधिक है। लेकिन यह 47,000 करोड़ रुपये के बजट अनुमान से थोड़ा कम है।
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