राइनहार्ट की इस क्षेत्र में रुचि तब शुरू हुई जब यह इतना लोकप्रिय नहीं था। हैनकॉक प्रोस्पेक्टिंग का कहना है कि उसने 2020 में लीनास में निवेश करना शुरू कर दिया था। यह चीन की ओर से निर्यात प्रतिबंधों को फिर से शुरू करने और रेयर अर्थ की मांग बढ़ने से सालों पहले की बात है। तब से उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की अराफुरा रेयर अर्थ्स से लेकर ब्राजील की ब्राजीलियन रेयर अर्थ्स लिमिटेड तक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इससे वह ग्लोबल रेयर अर्थ नेटवर्क में सबसे बड़ी निजी निवेशक बन गई हैं।
हालांकि, उन्होंने जिन सब चीजों में निवेश किया है, वे सब सोने में नहीं बदली हैं। उदाहरण के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग में गिरावट और सप्लाई की अधिकता के कारण लिथियम में उनका निवेश प्रभावित हुआ है। लायनटाउन रिसोर्सेज में, जिसमें हैनकॉक की 16% हिस्सेदारी है, शेयर की कीमत अपने चरम से 60% से ज्यादा गिर गई है। इसके बावजूद राइनहार्ट का विविधीकरण जानबूझकर लगता है। लोहे के अयस्क से होने वाली कमाई शायद स्थिर हो गई हो। लेकिन, महत्वपूर्ण खनिज अब विकास की एक नई कहानी पेश करते हैं।
राइनहार्ट कर रही हैं विस्तार
रेयर अर्थ अपने नाम के उलट दुर्लभ नहीं हैं। लेकिन, उन्हें निकालना मुश्किल और महंगा है। चीन इसलिए हावी रहा क्योंकि उसने जल्दी निवेश किया, पर्यावरणीय लागतों को सहन किया और विशाल प्रोसेसिंग क्षमता का निर्माण किया। राइनहार्ट समर्थित लीनास मलेशिया में एक बड़ी रिफाइनरी चलाती है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में एक और रिफाइनरी लगाने की योजना बना रही है। एमपी मटेरियल्स कैलिफोर्निया और टेक्सास में अपनी प्रोसेसिंग क्षमता का विस्तार कर रही है।राइनहार्ट का यह कदम ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और उसके सहयोगी चीन के प्रभाव से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के महीनों में ट्रंप प्रशासन ने एमपी मटेरियल्स और अराफुरा में सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश किया है। वहीं, ऐपल जैसी कंपनियों ने अमेरिकी सप्लायर्स से रेयर अर्थ मैग्नेट खरीदने के लिए लंबी अवधि के अनुबंध किए हैं। एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स अराफुरा के लिए एक और 300 मिलियन डॉलर पर विचार कर रहा है। अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया समझौते के बाद राइनहार्ट ने अराफुरा में अपनी हिस्सेदारी दोगुनी करके 15% कर ली थी।


