अमेरिका के इतिहास में पहली बार होने जा रहा ऐसा, कर्ज चुकाते-चुकाते निकल जाएगा सुपरपावर का दम!
Updated on
11-06-2024 02:22 PM
नई दिल्ली: अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी है। दूर-दूर तक कोई उसके आसपास नहीं है। IMF के मुताबिक अमेरिका की जीडीपी 28.783 ट्रिलियन डॉलर की है जबकि चीन 18.536 ट्रिलियन डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर है। लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिका का कर्ज तेजी से बढ़ा है। देश का कर्ज 34 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है जो उसकी जीडीपी का करीब 125 फीसदी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल अमेरिका को कर्ज के ब्याज के रूप में एक ट्रिलियन डॉलर का भुगतान करना होगा जो उसके डिफेंस बजट से भी ज्यादा है। अमेरिका के इतिहास में यह पहला मौका होगा जब देश का सालाना ब्याज भुगतान उसके रक्षा बजट से ज्यादा होगा। पिछले साल अमेरिका ने ब्याज भुगतान में जितना खर्च किया वह 25 साल में सबसे अधिक था और यह दूसरे विश्व युद्ध के स्तर से भी अधिक है।
कर्ज बढ़ने के साथ ही अमेरिका पर डिफॉल्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। देश की डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 125% के करीब पहुंच गया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 1800 के बाद 52 देशों का डेट-टु-जीडीपी रेश्यो 130 परसेंट से अधिक हुआ है। इनमें से 51 देश डिफॉल्टर हो गए थे। यही वजह है कि अमेरिका में भी तेजी से बढ़ रहे कर्ज पर चिंता जताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि नियर टर्म में अमेरिका के डिफॉल्टर होने का खतरा नहीं है लेकिन अगर इस स्थिति को नजरअंदाज किया गया तो इसके गंभीर दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। देश का कर्ज 34 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया है।
कैसे-कैसे बढ़ा कर्ज
अमेरिका का कर्ज पिछले 24 साल में छह गुना बढ़ा है। साल 2000 में अमेरिका पर 5.7 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज था जो अब 34 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया है। साल 2010 में यह 12.3 ट्रिलियन डॉलर और 2020 में 23.2 ट्रिलियन डॉलर था। यूएस कांग्रेस के बजट दस्तावेजों के मुताबिक अगले दशक तक देश का कर्ज 54 ट्रिलियन डॉलर पहुंचने का अनुमान है। पिछले तीन साल में ही देश का कर्ज 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक बढ़ चुका है। अमेरिका को रोज 1.8 अरब डॉलर ब्याज के भुगतान में खर्च करने पड़ रहे हैं। साफ है कि सरकार की कमाई कम हो रही है और खर्च बढ़ गया है। एनालिस्ट्स की मानें तो यह स्थिति देश की इकॉनमी और नेशनल सिक्योरिटी के लिए अच्छी बात नहीं है।
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