ये तो झांकी है, असली तस्वीर बाकी है... 15 महीने के रेकॉर्ड पर पहुंची महंगाई लेकिन अभी और रुलाएगी
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15-06-2024 04:59 PM
नई दिल्ली: मई महीने के थोक महंगाई के आंकड़े आ गए हैं। भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच खाने पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने से बीते महीने में थोक महंगाई बढ़कर 15 महीने के उच्चतम स्तर 2.61 प्रतिशत पर पहुंच गई। थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई लगातार तीन महीने से बढ़ रही है। अप्रैल में यह 1.26 प्रतिशत और मई 2023 में यह शून्य से 3.61% नीचे रही थी। लेकिन जून में इसमें और इजाफा होने की आशंका है। इसकी वजह यह है कि इस दौरान खाद्य तेल, दूध, सब्जियां खासकर आलू और प्याज की कीमत में तेजी आई है। अमूल और मदर डेयरी समेत कई कंपनियों ने दूध की कीमत बढ़ा दी है। इसी तरह खाद्य तेल की कीमत भी हाल में तेजी से बढ़ी है। प्याज की कीमत में एक हफ्ते में 50 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। हरी सब्जियों के साथ आलू के दाम भी चढ़ रहे हैं। साफ है कि जून में थोक महंगाई नए रेकॉर्ड पर जा सकती है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि मई 2024 में महंगाई बढ़ने का मुख्य कारण खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों के विनिर्माण, कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस, खनिज तेल और अन्य विनिर्माण उत्पादों की कीमतों में वृद्धि रही। डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई मई में 15 महीने के उच्चतम स्तर पर रही है। इसका पिछला उच्चतम स्तर फरवरी 2023 में देखा गया था, जब थोक महंगाई 3.85% थी। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 10 महीने के उच्च स्तर 9.82% पर पहुंच गई। मई में सब्जियों की महंगाई दर 32.42% रही, जो एक महीने पहले अप्रैल में 23.60% थी। इसी तरह प्याज की महंगाई दर 58.05%, जबकि आलू की महंगाई दर 64.05% रही। दालों की महंगाई दर मई में 21.95% रही।
थोक बनाम खुदरा महंगाई
हालांकि मई में थोक महंगाई की वृद्धि इस महीने के खुदरा महंगाई के आंकड़ों के विपरीत है। इस सप्ताह की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार मई में खुदरा महंगाई घटकर 4.75 प्रतिशत पर आ गई जो पिछले 12 महीनों का सबसे निचला स्तर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मौद्रिक नीति तैयार करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ही ध्यान में रखता है। आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में लगातार आठवीं बार ब्याज दर को यथावत रखने का फैसला किया था। बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता ने कहा कि देश में भीषण गर्मी के कारण खाद्य महंगाई भी ऊंची बनी रहने का अनुमान है। मॉनसून की प्रगति भविष्य में खाद्य महंगाई की दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।इसके अलावा वैश्विक धातु कीमतों में उछाल मैन्यूफैक्चरिंग कैटगरी में महंगाई बढ़ने का कारण बना। विनिर्मित उत्पादों में महंगाई मई में 0.78% थी, जो अप्रैल में शून्य से नीचे 0.42% थी। बार्कलेज की अर्थशास्त्री श्रेया सोढानी ने कहा कि मैन्यूफैक्चरिंग के लिए मूल्य सूचकांक (जिसका डब्ल्यूपीआई में सर्वाधिक 64% भारांक है) में लगातार चौथे महीने वृद्धि हुई है। यह दिखाता है कि कंपनियों की कच्चे माल की लागत बढ़ रही है। ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में महंगाई 1.35 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 1.38 प्रतिशत से मामूली कम है। इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘जून 2024 में अभी तक वैश्विक जिंस की कीमतों में मासिक आधार पर गिरावट आई है। इससे महीने में डब्ल्यूपीआई महंगाई में उछाल पर काबू पाने में मदद मिलेगी और प्रतिकूल आधार का मुकाबला किया जा सकेगा। कुल मिलाकर इक्रा का अनुमान है कि जून 2024 में कुल थोक महंगाई मामूली रूप से बढ़कर तीन प्रतिशत हो जाएगी।’
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