अमेरिका का होर्मुज से टोल वसूली का प्लान, उदय कोटक ने दी चेतावनी, याद दिलाया इतिहास
Updated on
08-04-2026 12:18 PM
नई दिल्ली: कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर उदय कोटक ने मंगलवार को चेतावनी दी। उनके मुताबिक, दुनिया शायद बड़े भू-राजनीतिक बदलाव के दौर में एंट्री कर रही है। भारत को सही मायने में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए रिसर्च, इनोवेशन और मैन्युफैक्चरिंग में और ज्यादा निवेश करना चाहिए। अमेरिका के होर्मुज स्ट्रेट से टोल वसूली के प्लान का जिक्र करते हुए कोटक ने इसे वैश्विक उपनिवेशवाद की वापसी करार दिया।
उदय कोटक फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। दिग्गज बैंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति एक अहम सवाल खड़ा करती है कि क्या दुनिया सामान्य स्थिति में लौटेगी या इसमें और गहरे संरचनात्मक बदलाव होंगे। खासकर बढ़ते संघर्ष और बदलती भू-राजनीतिक शक्ति को देखते हुए।हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का जिक्र करते हुए कोटक ने कहा, 'हम एक ऐसे अहम मोड़ पर खड़े हैं जिसे मैं वैश्विक उपनिवेशवाद की वापसी कहता हूं।'
ईस्ट इंडिया कंपनी की याद दिलाई
कोटक ने कहा, 'ट्रंप ने दो बातें कहीं जिनसे साफ पता चलता है कि हम एक बिल्कुल अलग दुनिया में हैं। पहली... जो भी युद्ध जीतेगा, उसे ही उसका फायदा मिलेगा। और दूसरी... अगर होर्मुज स्ट्रेट पर हमारा कब्जा हो जाता है तो हम यानी अमेरिका उसका किराया वसूलेंगे।'कोटक ने कहा कि इस तरह के घटनाक्रम उपनिवेशवादी विस्तार के ऐतिहासिक पैटर्न की याद दिलाते हैं। उन्होंने भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के उदय से इसकी तुलना की।
उन्होंने कहा, 'शुरुआती दौर में ईस्ट इंडिया कंपनी पूरी तरह से एक व्यापारिक कंपनी थी। वह व्यापार करती थी और पैसे कमाती थी। फिर उनके पास बेहतर टेक्नोलॉजी आ गई - बंदूकें और बारूद - जिससे उन्हें बढ़त मिली।'
कोटक ने आगे कहा, 'जल्द ही उस व्यापारी ने सोचा कि क्यों न मैं इलाके भी हथियाना शुरू कर दूं। इसी तरह आपने देखा कि वह व्यापारिक कंपनी भारत में ब्रिटिश साम्राज्य बन गई।'
दो आर्थिक सिनेरियो से समझाई अपनी बात
बैंकर के मुताबिक, दुनिया इस समय दो संभावित आर्थिक सिनेरियो का सामना कर रही है। पहला सिनेरियो उस वैश्विक व्यवस्था का जारी रहना है जो दूसरे विश्व युद्ध के बाद उभरी थी, जहां संकटों के बाद अर्थव्यवस्थाएं आमतौर पर ठीक हो जाती हैं।
उन्होंने कहा, 'पिछले 80 सालों में जब भी कोई संकट आया है, हमने देखा है कि चीजें फिर से औसत स्तर पर लौट आई हैं।'
हालांकि, कोटक ने कहा कि दूसरा सिनेरियो उन ढांचागत बदलावों की वापसी हो सकता है जिन्होंने 1945 से पहले वैश्विक इतिहास को परिभाषित किया था।
वह बोले, 'इस सिनेरियो में जब भी कोई संकट आता है तो दुनिया में ढांचागत बदलाव होते हैं। जमीनें जीती जाती हैं। शासक बदलते हैं। ताकत का राज चलता है।'
कोटक के अनुसार, जहां पहला सिनेरियो व्यवसायों के लिए आधार परिदृश्य बना रह सकता है। वहीं, गहरे ढांचागत बदलाव की थोड़ी सी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, 'भले ही यह कम संभावना वाली घटना हो, लेकिन इसका असर बहुत ज्यादा होता है। दूसरे परिदृश्य की संभावना आप चाहे कितनी भी कम क्यों न मानें, उसे शून्य न समझें।'
भारत की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर कही ये बात
भारत की ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर कोटक ने कहा कि अगर देश सचमुच आर्थिक रूप से मजबूत बनना चाहता है तो उसे इनोवेशन, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग पर ध्यान देना होगा।वह बोले, 'रिसर्च और इनोवेशन 'आत्मनिर्भर भारत' के मूल में होना चाहिए।' कोटक ने बताया कि भारतीय कंपनियां अक्सर अपनी खुद की क्षमताएं विकसित करने के बजाय आयातित तकनीकों पर निर्भर रहती हैं।उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि हम तकनीक खरीद सकते हैं। हम चीन से दुर्लभ खनिज (रेयर अर्थ) खरीद सकते हैं। हम अमेरिका से माइक्रोसॉफ्ट और अन्य तकनीकें ले सकते हैं। लेकिन, असल में 'आत्मनिर्भर भारत' कहां है?'
उन्होंने भारतीय कंपनियों के लिए सेवाओं से आगे बढ़कर उत्पादों के निर्माण पर ध्यान देने की जरूरत पर भी जोर दिया। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में
कोटक ने कहा, 'जैसे-जैसे एआई हमारे दरवाजे पर दस्तक दे रहा है, शायद ही किसी कंपनी ने खुद को उत्पाद-आधारित बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया हो।'
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