कौन हैं राजाराम मौर्य? 70 साल की उम्र में हाई स्कूल पास कर रचा इतिहास
Updated on
24-04-2026 05:23 PM
रायबरेली: शिक्षा को लेकर एक कहावत है कि पढ़ने-लिखने और सीखने की कोई उम्र समय सीमा नहीं होती है। कई लोगों ने उम्र के आखिरी पड़ाव में शिक्षा ग्रहण करके प्रमाणपत्र लेकर दिखाया है। ऐसा ही रायबरेली के रहने वाले राजाराम मौर्य ने 70 वर्ष की अपनी आयु में लोगों को यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणाम आने के बाद राजा राम मौर्य ने पाली भाषा से हाई स्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण कर न केवल अपनी काबिलियत को साबित करके दिखाया, बल्कि आज के युवाओं के लिए एक जीता जागता उदाहरण बन गए हैं।
मूल रूप से पंजाब के मोगा के रहने वाले राजाराम मौर्य का जन्म 11 दिसंबर 1956 को हुआ था उन्होंने अपनी ग्रेजुएट की शिक्षा पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ और पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी शिमला से की थी। एक अच्छे परिवार और बुद्धिजीवी परिवार की पृष्ठभूमि के बावजूद उनके मन में अपने पूर्वजों के इतिहास को अच्छी तरह से जानने की हमेशा से एक जिज्ञासा मन में थी।
राजा राम मौर्य ने क्या कहा?
राजाराम मौर्य ने बताया कि मेरे पूर्वज सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक मौर्य के कई शिलालेख पाली भाषा में है। उन्हीं शिलालेखों में क्या लिखा है और उसे स्वयं पढ़ने और जानने की जिज्ञासा ने मुझे इस उम्र में फिर से छात्र बनने के लिए एक प्रेरणा दी। उसको लेकर मैं हाई स्कूल की परीक्षा दी थी। उन्होंने बताया कि पाली भाषा का चुनाव विशेष रूप से इसी ऐतिहासिक जुड़ाव को लेकर मैंने इस भाषा को सीखने की कोशिश की।
राजाराम मौर्य ने 5 मार्च 1981 को पंजाब नेशनल बैंक में क्लर्क कम कैशियर के रूप में अपना करियर की शुरुआत की थी। अपनी इस सेवा के दौरान उन्होंने रायबरेली सहित विभिन्न शहरों में अपनी नौकरी की जिम्मेदारी निभाई और 31 दिसंबर 2016 को पंजाब नेशनल के स्टाफ ट्रेंनिंग सेंटर विभूति खंड गोमती नगर लखनऊ से सेवानिवृत्ति हो गए थे।
परिवार के बारे में
राजा राममोहन का पूरा परिवार शिक्षा के प्रति समर्पित दिखाई देता है। उन्होंने अपनी पत्नी अंजू बाला के साथ मिलकर अपने सभी बच्चों को उच्च पदों पर पहुंचने के लिए हर प्रकार की शिक्षा दिलाई। उनकी बड़ी बेटी आरती मौर्य कानपुर देहात में प्रधानाध्यापिका है। दूसरी बेटी मीनाक्षी केंद्रीय विद्यालय में अध्यापिका है और तीसरी बेटी बीनू सहायक अध्यापिका हैं। एक बेटा अमित विक्रम सीनियर इंजीनियर है और बहू लवली बेंगलुरु की एक कंपनी में एचआर पद पर कार्यरत हैं। सबसे छोटी बेटी डाली लखनऊ के एक प्रतिष्ठित स्कूल में अध्यापिका हैं।
1974 में पहली बार 62% अंकों के साथ हाई स्कूल पास करने वाले राजा राम मौर्य का कहना है कि तब और आपकी शिक्षा में काफी बदलाव देखा जा रहा है। राजाराम मौर्य ने बताया शिक्षा किसी जाति, धर्म या उम्र की मोहताज नहीं होती है। सीखने की अगर मन में जिज्ञासा है तो उसे पूरा करके ही किया जा सकता है। आज रायबरेली के लोग ही नहीं पूरे प्रदेश के लोग उनकी सफलता की सराहना कर रहे हैं।
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