5 जून, नई दिल्ली- राहुल गांधी के साथ यूपी के प्रमुख दलित और अति पिछड़ा वर्ग के नेताओं की बैठक हुई। विधानसभा चुनाव से पहले यह सपा के 'PDA' फॉर्मूले को और मजबूत करने की कोशिश थी।
4 जून, लखनऊ- भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा- यूपी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल चुनाव मॉडल अपनाएंगे। 1.76 लाख बूथ पालक तेजी से नियुक्त कर लीजिए। यहां भाजपा के 98 संगठनात्मक जिलों के अध्यक्ष मौजूद थे।
ये 3 संकेत इस बात को बढ़ावा दे रहे हैं कि कहीं यूपी में विधानसभा चुनाव तय समय से पहले तो नहीं होने वाले हैं। इस पर चुनाव आयोग के अधिकारी कहते हैं- वोटर लिस्ट का SIR कार्यक्रम जारी होना है। आमतौर पर फाइनल वोटर लिस्ट जनवरी के मध्य में आती है। अगर आयोग ने समय से पहले चुनाव का फैसला लिया, तो इस बार अंतिम वोटर लिस्ट नवंबर तक प्रकाशित कर दी जाएगी।
सपा और बसपा नेताओं का कहना है कि भाजपा मंदी के असर को पहले ही भांप गई है। इसलिए जल्दी चुनाव कराना चाहती है। वहीं, लखनऊ की ब्यूरोक्रेसी से जुड़े सोर्स राष्ट्रीय जनगणना में लगे कर्मचारियों को इसकी बड़ी वजह बता रहे हैं।
चुनाव तय समय से पहले कराने के 3 बड़े कारण
1- एक ही स्टाफ, दो बड़ी ड्यूटियां देश में जनगणना का पहला चरण चल रहा है, जो 30 सितंबर तक चलेगा। इसका दूसरा चरण 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच होना है। इसमें लोगों की सामाजिक-आर्थिक और जातीय जानकारी जुटाई जाएगी।
यूपी में इसके लिए 5.25 लाख शिक्षकों और 600 से ज्यादा एसडीएम/डीएम की ड्यूटी लगी है। यूपी में बूथों की संख्या बढ़कर 1.77 लाख हो चुकी है। इसके लिए चुनाव ड्यूटी में 7 लाख से ज्यादा कर्मचारी चाहिए। निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि जो स्टाफ जनगणना कर रहा, वही चुनाव भी कराता है। अगर दोनों काम साथ हुए, तो सचिवालय से लेकर ग्राम पंचायतों तक पूरा सिस्टम ठप हो जाएगा।
2- बोर्ड परीक्षाओं का टकराव फरवरी-मार्च के महीने में ही यूपी, सीबीएसई और आईसीएसई की बोर्ड परीक्षाएं भी होती हैं। लाखों शिक्षक परीक्षा कराने और कॉपियां जांचने में व्यस्त रहते हैं। 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद बोर्ड परीक्षाएं करवाई गई थीं।
3- आर्थिक मंदी और महंगाई से बदलता माहौल पीएम नरेंद्र मोदी और विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आने वाले दिनों में आर्थिक संकट और महंगाई को लेकर चिंता जता चुके हैं। वित्तीय वर्ष की आखिरी तिमाही (जनवरी-मार्च) में मंदी और महंगाई का असर जनता पर सीधे दिख सकता है। ऐसे में लोगों की नाराजगी सत्ताधारी पार्टी से हो सकती है। भाजपा ऐसा रिस्क नहीं लेना चाहेगी।
यूपी के राजनीतिक दलों की तैयारियां
चुनावी आहट मिलते ही यूपी के सभी राजनीतिक दल 'इलेक्शन मोड' में आ गए हैं। 2022 की बात करें, तो बसपा ने अपने कोऑर्डिनेटर और प्रभारी पहले तय कर दिए थे। पहली सूची 15 जनवरी को जारी हुई थी। सपा ने आचार संहिता लगने के बाद 13 जनवरी 2022 को अपनी पहली सूची जारी की थी। भाजपा की 15 जनवरी, 2022 को पहली सूची सार्वजनिक की थी। इस बार कैसी तैयारी है
भाजपा ने प्रभारी मंत्रियों को जिलों में भेजा