Select Date:

Ajit Pawar के चाचा की वो 3 गलतियां, जिससे राजस्थान में पैर नहीं जमा सकी NCP

Updated on 29-01-2026 01:00 PM
जयपुर : अजित पवार का 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा/NCP) के मुखिया थे। उनका अपनी पार्टी को नेशनल लेवल का दर्जा दिलाने का सपना अधूरा रहा गया। वहीं देश की एक ऐसी पार्टी भी है जो राष्ट्रीय स्तर का दर्जा बनाए रखने के साथ रीजनल पॉलिटिक्स में भी अपनी पकड़ बनाए है। यह और कोई नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश से शुरुआत करने वाली मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) है, जिसने धीरे-धीरे यूपी के बाहर भी अपनी पैठ बनाई। इनमें राजस्थान , बिहार, पंजाब, यूके जैसे राज्य शामिल हैं, जहां बसपा का कम से कम एक विधायक है।

अजित पवार का सबसे बड़ा सपना क्यों अधूरा


वरिष्ठ पत्रकार अशोक शर्मा बताते हैं कि अजित पवार को आधिकारिक तौर पर एनसीपी की कमान 2024 में मिली थी। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी में 2003 में बगावत हो गई थी। उसके बाद चुनाव आयोग ने इलेक्शन में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा कर उसका राष्ट्रीय स्तर का दर्जा छीन लिया था। 6 फरवरी 2024 को अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को आधिकारिक एनसीपी के रूप में मान्यता दी गई। इसके बाद अजित पवार एनसीपी को दोबारा राष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाने की मुहिम में जुट गए थे। इसके लिए उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव में हाथ भी आजमाया लेकिन सफल नहीं हुए। वहां विफल होने का कारण पार्टी का बिहार में एनडीए के खिलाफ लड़ना और कमजोर तैयारी माना गया।

क्या है रीजनल पॉलिटिक्स का हाल


शर्मा बताते हैं कि रीजनल पॉलिटिक्स में बीजेपी-कांग्रेस के अलावा BSP ही अपनी रणनीति में सफल रही है। क्योंकि उसका कोर वोट बैंक देश के कोने-कोने में है। इस कारण 2000 के दशक में उसने बड़ी तेजी से अपना फैलाव उत्तर प्रदेश के बाहर किया। हालांकि नंबर गेम में वह बहुत कामयाब नहीं हुई लेकिन उपस्थिति दर्ज कराने की स्थिति में जरूर पहुंची। बसपा के मौजूदा समय में यूपी में 1, राजस्थान में 2, पंजाब-उत्तराखंड-बिहार में उसके 1-1 विधायक हैं।

शरद पवार के फेल होने की वजह


वहीं NCP की बात करें तो वह 1999 में कांग्रेस से टूटकर बनी थी। शरद पवार के कार्यकाल में पार्टी ने भी महाराष्ट्र से बाहर पैर पसारने की कोशिश की लेकिन चुनाव-दर-चुनाव कोशिशों के बावजूद मजबूत आधार खड़ा करने में नाकाम रही। अकेले राजस्थान की बात करें तो वह दो बार विधानसभा चुनाव लड़ी पर कामयाब नहीं हुई। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक इसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं:


पहली वजह: एनसीपी का कोर वोटर कनेक्ट


वरिष्ठ पत्रकार राजीव तिवारी बताते हैं कि पॉलिटिक्स में किसी भी पार्टी की मजबूती का आधार उसका कोर वोट बैंक होता है। बसपा ने दलित-बहुजन समाज को अपनी राजनीति का केंद्र बनाया। राजस्थान जैसे राज्य में SC-ST और पिछड़े वर्ग की बड़ी आबादी ने BSP को सीधा सपोर्ट किया। वहीं NCP राजस्थान में यह तय ही नहीं कर पाई कि वह किस वर्ग की प्रतिनिधि पार्टी है। न किसान राजनीति, न दलित एजेंडा, न OBC या अल्पसंख्यक केंद्रित रणनीति। नतीजा यह हुआ कि आम वोटर के मन में सवाल बना रहा कि एनसीपी आखिर किसके लिए है?

दूसरी वजह: जमीन पर कैसा था संगठन


बीएसपी ने भले ही सत्ता न बनाई हो, लेकिन उसने बूथ स्तर तक संगठन खड़ा किया। कैडर, लोकल चेहरे और सामाजिक नेटवर्क-ये उसकी ताकत बने। इसके उलट NCP की राजनीति राजस्थान में अधिकतर चुनावी मौसम तक सीमित रही। चुनाव से कुछ महीने पहले सक्रियता, पोस्टर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और उम्मीदवारों की घोषणा लेकिन चुनाव खत्म होते ही गायब हो जाना। जानकार मानते हैं कि राजस्थान जैसे बड़े और जटिल राज्य में बिना स्थायी कैडर राजनीति टिक नहीं सकती।

तीसरी वजह: कांग्रेस की परछाईं से बाहर नहीं निकल पाई


महाराष्ट्र के बाहर NCP की पहचान अक्सर कांग्रेस की B-Team के रूप में बनी रही। राजस्थान में जहां कांग्रेस पहले से मजबूत संगठन और नेतृत्व के साथ मौजूद है, वहां NCP खुद को एक अलग विकल्प के तौर पर पेश नहीं कर पाई। वोटर का सीधा तर्क रहा कि जब कांग्रेस है ही, तो एनसीपी क्यों? इसके उलट BSP ने खुद को हमेशा कांग्रेस और बीजेपी दोनों से अलग तीसरे विकल्प के रूप में पेश किया।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 25 April 2026
पटनाः बिहार में मंत्रियों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे। इसे लेकर राज्य सरकार जल्द ही ठोस कदम उठा सकती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को विधानसभा में…
 25 April 2026
गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद से बड़ी खबर आई है। कुछ महीने पहले जिस यूट्यूबर सलीम वास्तिक के दफ्तर में घुसकर दो भाइयों ने हमला किया था, उसे दिल्‍ली पुलिस ने शुक्रवार…
 25 April 2026
हैदराबाद : भारत राष्ट्र समिति (BRS) की पूर्व नेता के. कविता ने शनिवार को अपनी नई राजनीतिक पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र सेना ( TRS ) लॉन्च की। BRS से अलग होने के…
 25 April 2026
अयोध्या: भीषण गर्मी और बढ़ती श्रद्धालु संख्या के बीच श्री राम मंदिर अयोध्या में दर्शन व्यवस्था को अधिक सुगम बनाने के लिए ट्रस्ट ने नई एडवाइजरी जारी की है। ऑनलाइन दर्शन…
 25 April 2026
नई दिल्ली: राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इन सांसदों का बीजेपी में शामिल होना कोई हैरानी की बात नहीं…
 25 April 2026
नई दिल्ली: जब 2022 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब से अपने राज्यसभा उम्मीदवारों की घोषणा की, तो सबका ध्यान लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक अशोक मित्तल या क्रिकेटर हरभजन सिंह…
 24 April 2026
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी के नेतृत्व के साथ सार्वजनिक मतभेद के कुछ दिनों बाद राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। चड्ढा ने अपने साथी राज्यसभा सांसदों संदीप पाठक…
 24 April 2026
रायबरेली: शिक्षा को लेकर एक कहावत है कि पढ़ने-लिखने और सीखने की कोई उम्र समय सीमा नहीं होती है। कई लोगों ने उम्र के आखिरी पड़ाव में शिक्षा ग्रहण करके प्रमाणपत्र…
 24 April 2026
बड़वानी: आम आदमी पार्टी से विधायक का चुनाव लड़ चुके एक व्यक्ति ने अपने पिता के माथे पर गोली मार थी। परिवार में जमीन और रुपयों के विवाद में उसने अपने…
Advt.