कितनी होगी बचत?
इंडस्ट्री के एक और अधिकारी ने कहा कि ईरान युद्ध का भारत की एलपीजी सप्लाई पर क्या असर पड़ा। एलपीजी के विकल्प के तौर पर अतिरिक्त इथेनॉल क्षमता का इस्तेमाल करना और फ्यूल का इंपोर्ट कम करना एक अच्छा ऑप्शन है। भारत अपने एलपीजी सोर्सिंग में विविधता लाया है, फिर भी हम एलपीजी इंपोर्ट के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है।फरवरी में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ई-कुकिंग और बायोगैस अपनाने से भारत 2050 तक एलपीजी सब्सिडी पर कुल मिलाकर 2 लाख करोड़ रुपये (24 अरब डॉलर) से ज्यादा की बचत कर सकता है।


