मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत मार्च 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को 100% नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, विधानसभा में पेश कैग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 5 साल में 27 हजार करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद 34 लाख घरों तक नल से जल नहीं पहुंचा पाया।
जल जीवन मिशन दिसंबर 2024 तक प्रदेश के कुल 1 करोड़ 11 लाख ग्रामीण परिवारों में से 77 लाख (60.90%) ही कवर कर पाया, जबकि प्रदेश में 13.53 लाख परिवारों के पास योजना से पहले से ही नल कनेक्शन उपलब्ध थे, फिर भी नया काम समय पर पूरा नहीं हुआ।
राष्ट्रीय तुलना: मार्च 2025 तक जहां देश में औसतन 80% परिवारों तक पानी पहुंचा, वहीं मध्य प्रदेश में कुल कवरेज मात्र 60.90% (1.11 करोड़ में से 77 लाख) ही रहा।
सितंबर 2024 तक 147 परियोजनाओं में से केवल 39 पूरी ही हो सकीं। 30 अनुबंधों में 136 से लेकर 1262 दिन तक की देरी हुई। इसके बावजूद ठेकेदारों को अनुचित भुगतान किया गया...
आंकड़ों का अंतर और बिना सर्वे काम...
कोई एजेंसी ही तय नहीं की गई
8 लाख परिवारों का अंतर: वर्ष 2023-24 में केंद्र और राज्य सरकार के प्रगति आंकड़ों में 8 लाख परिवारों का अंतर पाया गया।
सर्वे ही नहीं हुआ: हर घर जल पहुंचाने का सर्वे ही नहीं कराया गया और न ही इसके लिए कोई एजेंसी तय की गई।
सरकार पर 176.7 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
8 जिलों के 4,570 गांवों में जन-भागीदारी से 241.74 करोड़ रुपए जुटाने थे, लेकिन केवल 27 लाख रुपए ही जुटाए जा सके। नियमों का उल्लंघन कर लागत विभाजित करने से केंद्र पर 89.52 करोड़ रुपये और राज्य सरकार पर 87.18 करोड़ रुपए (कुल 176.7 करोड़ रुपए) का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा।