केंद्र ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि अपने अधिकारियों को समझाएं कि अपनी दैनिक कार्यशैली में छोटे-छोटे सुधार करें, तो इससे कार्यकुशलता, तनाव प्रबंधन और प्रशासनिक गुणवत्ता में सुधार आ सकता है।
सरकारी बैठकें अक्सर देरी से शुरू होती हैं और आवश्यकता से अधिक लंबी चलती हैं। कई बार लंबी बैठकों के बाद भी स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकल पाते। इसमें सुधार किया जाए तो सरकारी बैठकों की नई व्यवस्था से जनता को फास्ट सर्विस मिलेगी और फाइलों के निराकरण में तेजी आएगी।
भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों तथा राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों (ATIs) के महानिदेशकों को पत्र जारी कर कहा है कि विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों से बातचीत के दौरान यह सामने आया है कि सब्जेक्ट मैटर ट्रेनिंग के साथ-साथ सरकारी कार्यों की रूटीन प्रोसेस और व्यवहारिक पहलुओं पर भी मार्गदर्शन की आवश्यकता है। इससे अधिकारी बेहतर प्रशासक और प्रबंधक बन सकेंगे।
अफसर अक्सर ओल्ड वर्किंग और आदत में बंध जाते हैं
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सेवा करने वाले अधिकारी अक्सर पुरानी कार्यशैली और आदतों में बंध जाते हैं, जिससे आत्ममंथन और सुधार की प्रक्रिया कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में हर अधिकारी को स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए कि क्या मैं हर वर्ष स्वयं को पहले से बेहतर बना रहा हूँ ? क्या मैं केवल पुरानी कार्यशैली का अनुसरण कर रहा हूँ या अपने कार्यों में सुधार का प्रयास भी कर रहा हूं?
'30 साल का अनुभव' या 'एक साल का अनुभव 30 बार'?
पत्र में कहा गया है कि सेवा के अंतिम वर्षों में कई बार यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है कि किसी अधिकारी के पास वास्तव में 30 वर्षों का अनुभव है या फिर एक वर्ष के अनुभव को 30 बार दोहराया गया है। इसलिए निरंतर सीखना और सुधार करना आवश्यक है।
बैठकों के संचालन पर जारी होगी गाइड
पत्र में बताया गया है कि राष्ट्रीय सुशासन केंद्र के सहयोग से कैबिनेट सचिवालय समय-समय पर व्यवहारिक गाइड्स जारी करेगा। इसकी शुरुआत सरकारी बैठकों के प्रभावी संचालन विषय से की जा रही है।
पत्र के अनुसार, अधिकांश सरकारी बैठकों में अक्सर देरी से शुरुआत होती है। बैठकें आवश्यकता से अधिक लंबी चलती हैं और स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकल पाते। नई गाइड का उद्देश्य इन कमियों को दूर करना है।
कैबिनेट सचिव ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से कहा है कि इस गाइड को अपने अधीन कार्यरत सभी अधिकारियों तक पहुंचाया जाए। साथ ही राज्य प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों से भी आग्रह किया गया है कि वे राज्य सिविल सेवा अधिकारियों के प्रशिक्षण में इन व्यवहारिक सुधारों को शामिल करें।
जनता को क्या होगा फायदा
सरकारी बैठकों में लिए जाने वाले निर्णयों पर ही अधिकांश विकास कार्य, योजनाओं का क्रियान्वयन, सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार और जनकल्याण से जुड़े फैसले निर्भर करते हैं। यदि बैठकें समय पर और प्रभावी ढंग से होंगी तो योजनाओं का क्रियान्वयन भी तेज होगा और जनता को सेवाएं समय पर मिल सकेंगी।