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CM मोहन यादव आज लेंगे 5 विभागों की मीटिंग:जल स्रोतों के पुनर्जीवन को लेकर कलेक्टरों को निर्देश, जनभागीदारी को देना है तवज्जो

Updated on 28-05-2024 01:06 PM

प्रदेश के सभी नगरीय निकायों और पंचायतों में नदी, तालाब, कुओं, बावड़ियों व अन्य जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए 5 जून से प्रदेश में विशेष अभियान चलाया जाएगा। अभियान के लिए नगरीय क्षेत्रों में नगरीय विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसको लेकर नगरीय विकास, पंचायत और ग्रामीण विकास, किसान कल्याण और कृषि विकास, जल संसाधन, पीएचई विभाग के साथ मंत्रालय में मंगलवार को दोपहर बाद एक बजे कार्ययोजना पर अफसरों से चर्चा करेंगे।

भारत सरकार की अमृत 2.0 के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में जल संरचनाओं के उन्नयन का काम हो रहा है। इस अभियान के अंतर्गत सभी कलेक्टरों के नेतृत्व में जन प्रतिनिधि, सामाजिक तथा अशासकीय संस्थाओं और योजना व आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के अधीन काम कर रहे जन अभियान परिषद की सहभागिता के लिए शासन ने निर्देश जारी किए हैं। प्रमुख सचिव नगरीय विकास और आवास विभाग नीरज मंडलोई ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दिए निर्देश में कहा है कि अमृत 2.0 योजना में शामिल जल स्रोतों के उन्नयन का काम इस अभियान में पूरा कराया जाए।

जल स्त्रोतों की तलाश भी करेंगे कलेक्टर

कलेक्टरों से कहा है कि पहले से जहां काम चल रहे हैं। इसके अलावा अगर कोई जल स्त्रोत उपलब्ध है और उसके पुनर्जीवन व संरक्षण की आवश्यकता है तो इन संरचनाओं का उन्नयन कार्य स्थानीय, सामाजिक व अशासकीय संस्थाओं एवं जनभागीदारी से काम कराया जाए।

जल स्रोतों में गंदे पानी के नाले, नालियों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना के जरिए डायवर्ट कर उसका शुद्धिकरण किया जाए, और फिर जल स्रोतों में छोड़ा जाए।

ऐसे जल स्रोतों में जल प्रदाय, पर्यटन, भू जल संरक्षण, मस्त्य पालन, सिंघाड़े का उत्पादन भी जीर्णोद्धार व नवीनीकरण के माध्यम से किया जाए।

जल संरचनाओं के चयन एवं उन्नयन कार्य में जीआईएस तकनीक का उपयोग किया जाये।

जल स्रोतों के मौके पर जाकर चिह्नित संरचना की मोबाइल एप के माध्यम से जियो टैगिंग की जाए।

निकायों में पदस्थ अमृत 2.0 योजना के तकनीकी सलाहकारों की सहायता ली जाए।

ऐसे लेना है जनभागीदारी में सहयोग

जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार व उन्नयन कार्य में जन भागीदारी के लिए जो व्यवस्था तय की गई है, उसके अनुसार इस तरह काम कराए जाएंगे

जीर्णोद्धार या नवीनीकरण किए जाने वाले जल संग्रहण संरचना के कैचमेंट में आने वाले अतिक्रमण एवं अन्य गतिरोधों को दूर करना।

अनुभवों के आधार पर नगरीय निकाय को आवश्यक सलाह प्रदान करना ताकि उपयुक्त कार्य का चयन किया जा सके।

परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने एवं कार्य के क्रियान्वयन में आवश्यक सहयोग प्रदान करना।

क्रियान्वयन के दौरान जनभागीदारी श्रम, सामग्री, मशीनरी अथवा धन राशि के रूप में की जा सकती है।

विशेष अभियान के दौरान होने वाले कार्य की सतत् निगरानी करना।

बढ़ी हुई जल भंडारण क्षमता के प्रयोजन एवं वितरण प्रणाली का निर्धारण करना।

जल संरक्षण के कार्य में कैचमेंट के अतिक्रमण को हटाना।

कैचमेंट के उपचार जैसे नाले व नालियों की सफाई या इनका डायवर्सन सिल्ट ट्रैप पौधरोपण, स्टार्म वाटर ब्रेनेज मैनेजमेंट इत्यादि करना।

साथ ही बंड विस्तार, वेस्ट वियर सुधार, निर्माण, जल भराव क्षेत्र में जमा मिट्टी अथवा गाद को निकालना, डि-वीडिंग, एरेशन, पिचिंग, घाट निर्माण इत्यादि कार्य किये जा सकते हैं।

जल संग्रहण संरचनाओं से निकाली गई मि‌ट्टी एवं गांद का उपयोग स्थानीय कृषकों के खेतों में किया जाये।

जल संरचनाओं के किनारों पर यथासंभव बफर जोन तैयार किया जाये। इस जोन में हरित क्षेत्र व पार्क का विकास किया जाये।

अतिक्रमण रोकने का भी काम करना होगा

अभियान की कार्ययोजना को लेकर यह कहा गया है कि जल संरचनाओं के किनारों पर अतिक्रमण को रोकने के लिए फेंसिंग के रूप में पौधरोपण किया जाए। इनके संरक्षण के लिए सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से जागरुकता अभियान चलाया जाए।

जल संरचनाओं के आस-पास किसी भी प्रकार सूखा अथवा गीला कचरा फेंकना प्रतिबंधित किया जाए। प्रतिबंधित गतिविधियों के लिए सूचना प‌ट्टी लगाई जाए।

निकाय अंतर्गत पुराने कुएं एवं बावड़ियों की साफ-सफाई मरम्मत कार्य इस अवधि में कराई जाए।

निकाय क्षेत्र अंतर्गत विद्यमान रिहायशी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम यदि बंद पड़े हैं, तो उनकी सफाई कराकर उन्हें पुनः उपयोग किये जाने के लिए जागरूक किया जाए।

जल संरचनाओं के जल की गुणवत्ता (Physical, Chemical & Biological Parameters) की जांच कराई जाए।

जल संरचनाओं के कार्य के क्रियान्वयन के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण हेतु निकाय की तकनीकी अमले संभागीय कार्यालय एवं तकनीकी सलाहकारों द्वारा सतत मॉनिटरिंग की जाए।

जल संरचनाओं के जीर्णोद्वार व उपरांत वाटर ऑडिट (संरचना की मात्रा वृद्धि के बाद कितना पानी संग्रहीत हुआ कितना वितरित हुआ अथवा उपयोग हुआ तथा क्या परिणाम और लाभ प्राप्त हुए) के आधार पर निर्मित संरचना के अपेक्षित परिणाम) के अनुक्रम में प्राप्त हुए वास्तविक परिणामों (Achieved Outcome) का विश्लेषण और सत्यापन कराया जाए।

जल स्रोतों के जीर्णोद्धार कार्य की मॉनिटरिंग संभागीय संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास के माध्यम से की जाएगी।



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