पश्चिम एशिया युद्ध से हिली देश की बासमती चावल इंडस्ट्री, शिपमेंट में देरी ने बढ़ाई चिंता, किसानों पर भी असर
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31-03-2026 11:25 AM
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया युद्ध की मार देश के चावल उद्योग पर दिखाई दे रही है। इस युद्ध ने भारत की बासमती चावल इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया है। सबसे ज्यादा असर पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों के निर्यातकों पर दिखाई दे रही है। ये निर्यातक शिपमेंट में देरी, आसमान छूते माल भाड़े और पेमेंट में रुकावटों का सामना कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक निर्यातकों का कहना है कि युद्ध के कारण जहाजों को गंतव्य तक पहुंचने में काफी देरी लग रही है। इसके लिए उन्हें रास्ता भी बदलना पड़ रहा है जो काफी लंबा हो जाता है।
50000 करोड़ रुपये का दांव
देश में बासमती चावल एक्सपोर्ट इंडस्ट्री 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की है। हर साल करीब 60 लाख टन बासमती चावल एक्सपोर्ट होता है। इसका आधा हिस्सा ईरान, सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे देशों में जाता है। ऐसे में अगर शिपमेंट पहुंचने में देरी होती है तो इसका असर किसानों की इनकम पर भी दिखाई दे सकता है।
माल भाड़े में भारी उछाल
पश्चिम एशिया युद्ध के कारण माल भाड़े में काफी उछाल आया है। निर्यातकों के अनुसार खाड़ी देशों के लिए कंटेनर भाड़ा जो पहले 500 डॉलर था, वह अब बढ़कर 2000 से 2500 डॉलर तक पहुंच गया है।
कंपनियों ने वॉर रिस्क और इमरजेंसी सरचार्ज बढ़ा दिया है। ऐसे में माल भाड़े की लागत 5000 डॉलर तक जा रही है।
सीधे रास्तों के असुरक्षित होने के कारण जहाजों को ओमान और दुबई जैसे मध्यवर्ती बंदरगाहों पर रोका जा रहा है। इससे हैंडलिंग और स्टोरेज का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
पंजाब को सबसे ज्यादा खतरा
पश्चिम एशिया तनाव का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा के किसानों पर दिखाई दे सकता है।
पंजाब और हरियाणा भारत के बासमती उत्पादन का 70 से 80% हिस्सा संभालते हैं।
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