पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से हर चीज हो जाएगी महंगी
Updated on
20-05-2026 01:32 PM
नई दिल्ली: भारत में महंगाई अब एक नई उलझन बन गई है। रिटेल मार्केट में तो सब कुछ सामान्य दिख रहा है, लेकिन थोक बाजार में महंगाई ने 42 महीने का रेकॉर्ड तोड़ दिया है। पश्चिम एशिया के तनाव की वजह से कच्चा तेल 88% महंगा हो गया है। जानकारों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम में हुई बढ़ोतरी और महंगे डीजल की वजह से अब जल्द ही सब्जियां, दूध और ट्रांसपोर्ट जैसी रोजमर्रा की चीजें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाली हैं।
क्या होगा असर? दो किस्तों मेंपेट्रोल-डीजलके दाम कुल 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ने का असर जल्द ही रिटेल महंगाई पर दिखेगा, जिससे आम आदमी के घर का बजट बिगड़ सकता है। जानकारों के मुताबिक, इससे महंगाई में करीब 20 बेसिस पॉइंट्स (0.20%) की बढ़ोतरी हो सकती है।
क्या हैं CPI और WPI महंगाई? कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI): यह उन चीजों की कीमतों को मापता है जो आम लोग रोज इस्तेमाल करते हैं, जैसे खाना, घर, ट्रांसपोर्ट, इलाज और पढ़ाई। आसान भाषा में कहें तो CPI वो महंगाई है जो आम परिवार महसूस करते हैं।होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI)यह थोक के स्तर पर कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है। इसमें ईंधन, कच्चा माल, धातु और कारखानों में बनने वाली चीजों के दाम शामिल होते हैं। इसे 'खतरे की घंटी' की तरह देखा जाता है। जब थोक में लागत बढ़ती है, तो आगे चलकर कंपनियां उसे ग्राहकों से ही वसूलती हैं।
अप्रैल में आंकड़े क्या रहे? भारत मेंरिटेल महंगाई(CPI) अप्रैल 2026 में मामूली बढ़कर 3.48% पर पहुंच गई, जो मार्च में 3.40% थी। हालांकि, थोक महंगाई (WPI) मार्च के 3.88% से छलांग लगाकर अप्रैल में 8.3% पर पहुंच गई। यह 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। सबसे बड़ी बढ़ोतरी ईंधन और बिजली के सेगमेंट में हुई, जो एक महीने पहले 1.05% थी और अब बढ़कर 24.71% हो गई। कच्चे तेल की महंगाई में 88% से ज्यादा का उछाल आया।
आगे क्या आशंका है? अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक महंगाई मई में 9% तक पहुंच सकती है क्योंकि पश्चिम एशिया संकट थम नहीं रहा है। ग्लोबल मार्केट में ऊंची कीमतें जल्द ही घरेलू ईंधन, मैन्युफैक्चरिंग और ट्रांसपोर्ट लागत में दिखने लगेंगी। मई में रिटेल महंगाई भी बढ़ने की आशंका है क्योंकि महंगा तेल, खाना और ट्रांसपोर्ट अब खुदरा कीमतों पर असर डालना शुरू करेंगे। पेट्रोल-डीजल के दाम में 4 साल बाद हुई बढ़ोतरी इस दबाव को और बढ़ाएगी। तेल के बढ़े हुए दामों का पूरा असर जून के आंकड़ों में दिखेगा, जो जुलाई के बीच में आएंगे।
तेल का रोल कितना? महंगाई मापने की रिटेल बास्केट (CPI) में पेट्रोल-डीजल का अपना अलग हिस्सा नहीं है, बल्कि इन्हें ट्रांसपोर्ट और बिजली के साथ रखा गया है। थोक महंगाई (WPI) में ईंधन का बहुत बड़ा रोल है। इसका वजन करीब 13.15% है। महंगा तेल मतलब महंगा ट्रांसपोर्ट, महंगी ढुलाई, महंगा खेती का सामान और महंगी फैक्ट्री। इसमें डीजल सबसे अहम है क्योंकि भारत में करीब 40 फीसदी डीजल का ही इस्तेमाल होता है। ट्रक, बसें, खेती के पंप, जेनरेटर और फैक्ट्रियां इसी से चलती हैं। डीजल के दाम बढ़ने से आखिरकार सब्जियां, दूध, पैकेट बंद सामान, सीमेंट और स्टील जैसी हर चीज महंगी हो जाती है।
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप की कंपनी इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) के शेयरों में आज शुरुआती कारोबार में करीब 2% गिरावट आई। बीएसई पर यह…
नई दिल्ली: पूंजी बाजार में एथिकल इन्वेस्टिंग को बढ़ावा देने के लिए NSE ने निफ्टी 500 अहिंसा इंडेक्स की शुरुआत की है। इसमें निफ्टी 500 की उन कंपनियों को शामिल…
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंपोर्टेड जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध तरीके…
नई दिल्ली: सरकार एयरपोर्ट ऑपरेटर्स को एयरलाइन शुरू करने की अनुमति दे सकती है। इससे अडानी ग्रुप और जीएमआर एयरपोर्ट्स के एयरलाइन सेक्टर में उतरने का रास्ता साफ हो सकता…
नई दिल्ली: इस साल देश के सबसे बड़े आईपीओ एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की आज शेयर मार्केट में लिस्टिंग हो गई। हालांकि यह निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं रही। बाजार…
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने जून तिमाही में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। इस दौरान कंपनी का नेट प्रॉफिट में…
नई दिल्ली: भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते (CETA) से भारतीय बाजारों की रौनक बढ़ने वाली है। अब आम ग्राहकों के पास बाजारों में सामान चुनने के लिए और भी ज्यादा विकल्प होंगे।…