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'UN से उठ जाएगा भरोसा', संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की नाकामी पर बरसा भारत, ट्रंप भी बता चुके 'नकारा'

Updated on 15-07-2026 02:25 PM
न्यूयॉर्क: भारत ने गंभीर चेतावनी दी है कि संयुक्त राष्ट्र के बारे में लोगों की राय खराब हो रही है क्योंकि यह सुरक्षा परिषद में सुधार करने में नाकाम रहा है। भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद झगड़ों को खत्म करने और इंसानी तकलीफों को दूर करने में नाकाम रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने स्थानीय समय के मुताबिक मंगलवार को कहा 'हाल के समय में UN के बारे में लोगों की सोच नकारात्मक हुई है जिसकी मुख्य वजह दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चल रहे झगड़ों में सुरक्षा परिषद का असरदार ढंग से दखल न दे पाना है।'
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा 'सुरक्षा परिषद प्रभावित आबादी की तकलीफों को खत्म करने में बेअसर रही है' और इससे अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने बुनियादी सिद्धांत को कायम रखने की उसकी क्षमता पर सवाल उठता है। पी. हरीश 2024 के विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन में 'भविष्य के लिए बहुपक्षवाद को उपयुक्त बनाना' विषय पर मंत्रियों की गोलमेज बैठक में बोल रहे थे जो 'भविष्य के लिए समझौते' के लक्ष्यों में से एक है।

भारत ने यूएनएससी में सुधार की मांग को दोहराया

पी. हरीश ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया 80 साल पुराना UN का ढांचा आज की वैश्विक चुनौतियों के लिए नाकाफी है। उन्होंने कहा 'एक समूह के तौर पर UN सुरक्षा परिषद में सुधार की दिशा में कोई खास प्रगति नहीं कर पाया है।' उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि परिषद में सुधार के लिए अंतर-सरकारी बातचीत (IGN) 'सिर्फ पहले से तैयार बयानों के कभी न खत्म होने वाले चक्र तक ही सीमित रही है।'
इसके अलावा भारतीय दूत ने वैश्विक संघर्षों में 'असरदार ढंग से दखल देने' में UNSC की नाकामी की कड़ी आलोचना की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि युद्ध रोकने और मानवीय पीड़ा कम करने में सुरक्षा परिषद की नाकामी ने संयुक्त राष्ट्र में लोगों का भरोसा कम किया है।
इसलिए उन्होंने कहा कि समझौते के 39 से 42 नंबर के एक्शन पॉइंट्स जिनमें हिंसा, नस्लवाद और ज़ेनोफ़ोबिया को खत्म करने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और परिषद द्वारा शांति बनाए रखने की असरदार रणनीतियां बनाने की बात शामिल है वो काफी हद तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहे हैं। उन्होंने कहा 'यह स्थिति बनी नहीं रह सकती और इसमें बदलाव जरूरी है।'

डोनाल्ड ट्रंप भी संयुक्त राष्ट्र को बता चुके हैं 'बेकार'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका और उसकी उपयोगिता पर तीखे सवाल उठा चुके हैं। हालांकि अमेरिका के पास संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार हासिल है। सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 80वें सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने खुले मंच से संयुक्त राष्ट्र को एक तरह से 'बेकार' और अक्षम कहा था।

ट्रंप ने अपने भाषण में दावा किया था कि उन्होंने हाल के समय में 'सात ऐसे युद्धों को समाप्त किया जिन्हें खत्म करना असंभव माना जा रहा था' लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र ने कोई मदद या सहयोग नहीं दिया। उन्होंने शिकायत की थी कि 'मैंने इन सभी देशों के नेताओं से बात की लेकिन मुझे संयुक्त राष्ट्र से एक फोन कॉल तक नहीं आया।'

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