Select Date:

शक्सगाम घाटी से CPEC तक, 5180 km जमीन पर चीन-पाकिस्तान के नए 'सीमा समझौते' से भारत क्यों हुआ बेचैन?

Updated on 21-09-2026 12:23 PM
बीजिंग/इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत ने इस महीने चीन-पाकिस्तान की तरफ से 'पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग' पैक्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान ने इसे एक 'महत्वपूर्ण उपलब्धि' बताया है और उसका कहना है कि इससे सीमा प्रबंधन, संयुक्त सर्वेक्षण, व्यापार और लोगों के बीच आपसी संपर्क में सहयोग बढ़ेगा।

चीन-पाकिस्तान समझौता क्या है?- दरअसल पाकिस्तान-चीन सीमा समझौता मूल रूप से 1963 में किया गया था। इसके तहत पाकिस्तान ने अवैध कब्जाए गए कश्मीर (PoK) की शक्सगाम घाटी (Shaksgam Valley) का 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को सौंप दिया था। अब इस महीने दोनों देशों ने 2013 के सीमा प्रबंधन समझौते के तहत पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग को सक्रिय कर दिया है जिसकी पहली बैठक इस्लामाबाद में हुई है। भारत इस पूरे हिस्से को लद्दाख का हिस्सा मानता है।
भारत की आपत्ति क्या है?- भारत ने इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे कानूनी आधार के बिना बताकर खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि वह पाकिस्तान और चीन के बीच ऐसी किसी भी सीमा को मान्यता नहीं देता जो उस इलाके से जुड़ी हो जिस पर भारत अपना दावा करता है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा 'पाकिस्तान और चीन के बीच कोई सीमा नहीं है। हम तथाकथित संयुक्त आयोग को खारिज करते हैं जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है।'

भारत का कहना है कि यह इलाका पहले की रियासत जम्मू-कश्मीर का हिस्सा था और चीन को सौंपे जाने से पहले पाकिस्तान ने इस पर गैर-कानूनी कब्जा कर लिया था। भारत सरकार ने इस समझौते को कभी मान्यता नहीं दी है और इसे गैर-कानूनी और अमान्य मानती है।

चीन-पाक नए सीमा आयोग से भारत को क्यों होना चाहिए परेशान?

बीबीसी से बात करते हुए दिल्ली की शिव नादर यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस एंड गवर्नेंस स्टडीज विभाग के प्रोफेसर जबिन टी. जैकब ने कहा कि यह नई घटनाक्रम पूरी तरह से नई व्यवस्था के बजाय एक पुराने सिस्टम को फिर से शुरू करने जैसा है। उन्होंने बीबीसी को बताया '1963 के चीन-पाकिस्तान समझौते में एक संयुक्त सीमा आयोग का प्रावधान है बस सवाल इसके काम शुरू करने के समय का है।'

उन्होंने कहा कि इस समय के कई कारण हो सकते हैं जिनमें चीन की अपनी सीमाओं को तय करने की व्यापक कोशिश और सीमा पर आदान-प्रदान और आवाजाही को संस्थागत बनाने की इच्छा शामिल है खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान की अन्य सीमाओं पर संघर्ष और अस्थिरता रही है। जैकब ने कहा कि इस घटनाक्रम से भारत को 'चिंतित' होना चाहिए। इससे भी अहम बात यह है कि यह कदम 1963 की संधि के ही एक प्रावधान की अनदेखी करता हुआ प्रतीत होता है। जैकब ने कहा कि समझौते के अनुच्छेद 6 में यह प्रावधान था कि कश्मीर विवाद सुलझने के बाद जिस भी देश का उस इलाके पर अंतिम रूप से नियंत्रण होगा उसके साथ इस समझौते पर फिर से बातचीत की जाएगी।

चीन-पाकिस्तान को क्या फायदे हैं?

भारत की यह चिंता सीमा के व्यावहारिक प्रबंधन से अलग है। पाकिस्तान और चीन के बीच इस इलाके में पहले से ही बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी लिंक मौजूद हैं जिनमें चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) और काराकोरम हाईवे शामिल हैं। अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत और अब अनवर गरगश डिप्लोमैटिक एकेडमी और हडसन इंस्टीट्यूट में सीनियर फेलो हुसैन हक्कानी ने बीबीसी से कहा 'नया कमीशन व्यावहारिक और राजनीतिक, दोनों तरह का है।'

हक्कानी ने बीबीसी की रिपोर्ट में कहा है कि यह दोनों का मिला-जुला रूप है। यह बॉर्डर और सीमा पर सहयोग बढ़ाने, गैर-कानूनी तरीके से सीमा पार करने से रोकने और CPEC से जुड़े रणनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा करने का एक तरीका है। उन्होंने कहा कि इससे भारत को यह संकेत भी मिला कि बीजिंग कश्मीर को पाकिस्तान के नजरिए से ही देखता है।
हक्कानी ने कहा 'चीन ने कश्मीर पर भारत के रुख को कभी स्वीकार नहीं किया है और वह गिलगित-बाल्टिस्तान को भारत के नहीं बल्कि पाकिस्तान के नजरिए से देखता है।' उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के उस इलाके का जिक्र किया जो चीन की सीमा से सटा है और जिस पर भारत अपना दावा करता है। हक्कानी ने कहा कि 'भारत के कश्मीर में हुए घटनाक्रमों के जवाब में इस्लामाबाद का रुख बदला है।' उनका मतलब कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने को लेकर था।


क्या PoK में अवैध कब्जे को पक्का कर रहे चीन और पाकिस्तान?

चीन, भारत और पाकिस्तान के बीच के झगड़े का फायदा उठा रहा है। यह व्यवस्था चीन की पड़ोसी देशों के साथ अपने रिश्तों का इस्तेमाल करके भारत के प्रति अपनी स्थिति को संभालने और संकेत देने के व्यापक पैटर्न का भी हिस्सा है। हक्कानी ने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को भरोसा दिलाना बीजिंग के लिए रणनीतिक और भू-राजनीतिक दोनों ही नजरिए से अहम था।
उन्होंने कहा 'रणनीतिक नजरिए से यह पाकिस्तान के साथ संबंधों को और मजबूत करता है और भू-रणनीतिक नजरिए से यह भारत के उस डर को और बढ़ाता है कि उसे चीन और पाकिस्तान दोनों तरफ से खतरा हो सकता है। इससे पाकिस्तान खुश होता है और चीन को फायदा होता है।' हक्कानी कहते हैं 'चीन हमेशा अपने फैसले महीनों, या सालों पहले ही तय कर लेता है इसलिए संयुक्त सीमा आयोग को चालू करने का फैसला भी कुछ समय पहले ही लिया गया होगा।'

कुल मिलाकर चीन के इस कदम से साफ होता है कि भारत चीन पर भरोसा नहीं कर सकता है। चीन उसे दक्षिण एशिया में लगातार परेशान करता रहेगा। वो पाकिस्तान, मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों को भारत के खिलाफ प्रॉक्सी की तरह इस्तेमाल करेगा ताकि भारत उलझा रहे।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 21 September 2026
बीजिंग/इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत ने इस महीने चीन-पाकिस्तान की तरफ से 'पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग' पैक्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तान ने इसे एक 'महत्वपूर्ण उपलब्धि' बताया है और उसका…
 21 September 2026
काठमांडू: भारत की आयात पर सख्ती के चलते नेपाल को नुकसान उठाना पड़ा है। दिल्ली के सेफगार्ड ड्यूटी (सुरक्षा शुल्क) लगाने से पिछले वित्त वर्ष में नेपाल के स्टील निर्यात…
 21 September 2026
दुबई: भारत में आरक्षण को लेकर चल रहे विवाद और मेरिट की लड़ाई के बीच सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छिड़ गई है। मशहूर इनवेस्टर अक्षत श्रीवास्तव ने देश…
 21 September 2026
इस्लामाबाद: लाल टोपी के नाम से कुख्यात पाकिस्तान के कथित विश्लेषक जैद हामिद ने आर्मी चीफ असीम मुनीर को यमन से दूर रहने के लिए कहा है। हामिद ने कहा…
 21 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने जेल में बंद अपने सर्वोच्च लीडर इमरान खान के लिए सड़कों पर उतरने का…
 21 September 2026
वॉशिंगटन: ब्रायन जॉनसन की जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा ऐसे कामों में गुजरता है, जो आमतौर पर लोगों को बहुत अजीब लग सकता है। वह सुबह 4 बजे उठकर 11 बजे…
 21 September 2026
काठमांडू/नई दिल्ली: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह की भारत को लेकर नीति क्या है और पुरानी सरकारों से इतर उनकी सरकार नई दिल्ली को लेकर क्या रखती है इसका पहली…
 21 September 2026
इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और ठीक उसके बगल वाले शहर रावलपिंडी को पूरी तरह से किले में बदल दिया है। हजारों की संख्या में कंटेनर्स से राजधानी इस्लामाबाद आने…
 20 September 2026
ढाका: बंगाली समाज में कहावत है 'इलिश छाड़ा पूजा अधूरा' यानि हिलसा के बिना दुर्गा पूजा अधूरी है। लेकिन पिछले कुछ समय से दक्षिण एशियाई समुद्री व्यापार के गलियारों में…
Advt.