गाजियाबाद वालों अब जेब होगी ढीली! बढ़ा हाउस टैक्स रहेगा बरकरार, हाई कोर्ट ने PIL खारिज की
Updated on
26-02-2026 11:47 AM
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हाउस टैक्स की बढ़ी हुई दरों को लेकर चल रहा कानूनी विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नगर निगम द्वारा टैक्स वृद्धि के फैसले को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने 77 पन्नों के विस्तृत फैसले में कहा कि टैक्स बढ़ाने की प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई। इस फैसले के बाद अब शहरवासियों को बढ़ी हुई दरों पर ही हाउस टैक्स जमा करना अनिवार्य होगा।
6 लाख करदाताओं पर असर
नगर निगम क्षेत्र में करीब 6 लाख लोग हाउस टैक्स जमा करते हैं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत से अधिक लोग पहले ही टैक्स जमा कर चुके हैं, जबकि शेष लोगों ने कोर्ट के फैसले का इंतजार करते हुए भुगतान रोक रखा था। अब हाई कोर्ट के निर्णय के बाद बकायेदारों से सख्ती से वसूली की जाएगी।
क्या थी याचिकाकर्ताओं की दलील
पूर्व पार्षद राजेंद्र त्यागी और अन्य ने वरिष्ठ अधिवक्ता समीर शर्मा के माध्यम से अदालत में तर्क दिया कि नगर निगम ने बिना उचित प्रक्रिया अपनाए और बिना आपत्तियों का सही निस्तारण किए हाउस टैक्स में भारी बढ़ोतरी कर दी। इसे जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए उन्होंने वृद्धि को निरस्त करने की मांग की थी।राजेंद्र त्यागी ने कहा कि जनता के हित में पूरी कोशिश की गई, लेकिन मेयर स्तर पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। उनका आरोप था कि जब बोर्ड ने टैक्स वृद्धि को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया, तब उसे शपथपत्र के साथ अदालत में प्रभावी ढंग से पेश नहीं किया गया।
नगर निगम और सरकार का पक्ष
नगर निगम की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और वरिष्ठ अधिवक्ता शशि नंदन ने दलील दी कि टैक्स निर्धारण संपत्तियों के वर्गीकरण और न्यूनतम मासिक किराये के आधार पर किया गया है, जो पूरी तरह वैधानिक है। उनका कहना था कि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए राजस्व बढ़ाना आवश्यक है और पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप अपनाई गई।
20 प्रतिशत छूट का लाभ फरवरी तक
नगर निगम ने यह स्पष्ट किया है कि फरवरी तक टैक्स जमा करने वालों को 20 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। ऐसे में जिन लोगों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है, वे निर्धारित समयसीमा के भीतर छूट का लाभ उठा सकते हैं।
स्टे खत्म, अब होगी सख्त वसूली
हाई कोर्ट के फैसले के बाद टैक्स वृद्धि पर लगी अनिश्चितता समाप्त हो गई है। नगर निगम अब उन सभी बकायेदारों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगा, जिन्होंने कोर्ट केस का हवाला देकर कई महीनों से टैक्स जमा नहीं किया था। मेयर सुनीता दयाल ने कहा कि सदन ने जनता के हित में प्रस्ताव पारित किया था और आगे भी जनता के साथ खड़ी रहेंगी।
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