'ईरान सीजफायर पर शहबाज-मुनीर को नोबेल दो', पाकिस्तानियों ने की मांग तो विदेशी पत्रकार ने कहा- भारत में मिल जाओ
Updated on
09-04-2026 01:33 PM
इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान का युद्ध रोकने में पाकिस्तान ने कथित तौर पर सबसे अहम भूमिका निभाई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर की कोशिश को सराहा है। इसने पाकिस्तानियों को खुश कर दिया है। यहां तक कि पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया में कहा जा रहा है कि ईरान-अमेरिका युद्ध में हस्तक्षेप के लिए उनका देश नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार है। वहीं कई विदेशी लोगों ने पाकिस्तानियों की इस मांग के लिए मजाक उड़ाया है।
पाकिस्तानियों का तर्क है कि इस्लामाबाद ने एक संभावित विनाशकारी युद्ध को टालने में अहम भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के नेतृत्व की कोशिश से ही दोनों पक्षों ने सैन्य टकराव के बजाय बातचीत को चुना है। ऐसे में असीम मुनीर और शहबाज शरीफ को वॉशिंगटन-तेहरान के बीच मध्यस्थता के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए।
'पाकिस्तान को इंडिया में मिला लो'
स्कॉटलैंड के पूर्व मिनिस्टर हमजा यूसुफ ने एक्स पर लिखा कि पाकिस्तान अपने मध्यस्थता प्रयासों के लिए आभार का हकदार है। पूरी दुनिया ने अपनी सांसें थाम रखी थीं क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप की समय-सीमा नजदीक आ रही थी, जिन्होंने ईरानी सभ्यता को मिटाने की धमकी दी थी। इसका यह संकेत भी है कि मध्यस्थता का केंद्र यूरोप से हटकर पूरब की ओर खिसक गया है।
हमजा के पाकिस्तान की तारीफ करने और यूरोप की अहमियत घटने पर ब्रिटेन के पत्रकार टोमी रॉबिनसन ने तंज कसा है। उन्होंने पाकिस्तान में आतंकियों को पनाह मिलने की ओर इशारा करते हुए जवाब दिया। रॉबिनसन ने हमजा के ट्वीट के जवाब में लिखा, 'पाकिस्तान को फिर से भारत बना दो। मुझे उस देश पर भरोसा नहीं है जिसने ओसामा बिन लादेन को छिपाकर पनाह दी।'
पाकिस्तानी क्या कह रहे हैं
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर को नोबेल शांति पुरस्कार देना शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान के महत्व को बढ़ाएगा। यह ऐसे समय हो रहा है, जब अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद इस्लामाबाद समझौते को सुरक्षित करने वाली बातचीत के लिए अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है।
पाकिस्तान के पीएम शरीफ ने सोशल मीडिया पर बताया है कि उन्होंने दोनों देशों (ईरान और अमेरिका) के नेतृत्व के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। शरीफ की ओर से विवादों को सुलझाने के लिए एक निर्णायक समझौते पर आगे बातचीत करने के लिए ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद आने की दावत दी गई है।
सोशल मीडिया पर मजाक
पाकिस्तान में एक और मध्यस्थता की कोशिशों के लिए शहबाज शरीफ और असीम मुनीर की तारीफ हो रही है तो वहीं मजाक भी उड़ाया जा रहा है। कई यूजर्स ने लिखा है कि जैसे भारत-पाकिस्तान में कथित मध्यस्थता के लिए डोनाल्ड ट्रंप को शांति को नोबेल मिला है, वैसे ही मुनीर और शरीफ को भी ये पुरस्कार मिल जाएगा।
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