होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारतीय नाविकों के लिए खुशखबरी, UN ने 11000 लोगों को निकालने का काम किया शुरू
Updated on
24-06-2026 12:37 PM
तेहरान/नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र के इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 11,000 से ज्यादा नाविकों को निकालने का काम शुरू कर दिया है। यह कदम ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद उठाया गया है। IMO के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि यह ऑपरेशन 'ईरान, ओमान, क्षेत्र के सभी तटीय देशों, अमेरिका और समुद्री उद्योग के साथ मिलकर' चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा 'हमने जरूरी सुरक्षा गारंटी हासिल कर ली है और इन ऑपरेशन्स के लिए सुरक्षित नेविगेशन की शर्तों की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल कर ली है।' 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद तेहरान ने इस जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था जिससे जहाज जलमार्ग पर ही फंस गए थे। सैकड़ों जहाज पिछले 2-3 महीनों से होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए थे जिन्होंने स्विट्जरलैंड समझौते के बाद राहत की सांस ली है।
होर्मुज स्ट्रेट से नाविकों को निकालने का काम शुरू
पिछले हफ्ते समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद से शिपिंग ट्रैफिक बढ़ गया है। शिपिंग इंटेलिजेंस एजेंसी 'केप्लर' की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार को कम से कम 36 कमर्शियल जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे जो युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रैफिक का एक रिकॉर्ड स्तर है। ओमान के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक IMO प्लान के तहत लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया कई महीनों से चर्चा में रही है और इसे चरणों में पूरा किया जाएगा। मंत्रालय ने कहा 'मौजूदा हालात में जहाजों के आपस में टकराने का खतरा ज्यादा है इसलिए जहाजों के ट्रैफिक को धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से वहां से निकालना जरूरी है।'डेनमार्क ने मंगलवार को घोषणा की कि वह फ्रांस और ब्रिटेन की तरफ से शुरू किए गए एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशन में शामिल होगा जिसका मकसद अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने में मदद करना है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मंगलवार को संयुक्त अरब अमीरात पहुंचे और फिर से कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी अंतिम समझौते के तहत ईरान को जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) में टोल वसूलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा 'यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर टोल या फीस वसूलने की इजाजत नहीं है।' उन्होंने आगे कहा कि उन्हें यकीन है कि 'इस क्षेत्र के सभी देश इस बात से सहमत होंगे।'
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