उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक की करियर क्यों फंसी हुई है?
दीपक प्रकाश ने नवंबर 2025 में बिना विधायक या विधान परिषद सदस्य रहे मंत्री पद की शपथ ली थी।दीपक को 6 महीने के भीतर (यानी मई 2026 तक) किसी भी सदन का सदस्य बनना जरूरी था।
अब नीतीश सरकार नहीं रही तो एमएलसी बनने की बाध्यता खत्म हो गई। मगर, सदन का सपना तो है।
मंगल पांडेय के इस्तीफे से खाली हुई विधान परिषद की सीट पर चर्चा थी लेकिन दीपक को नहीं मिली।
बीजेपी ने अपने पुराने कार्यकर्ता अरविंद शर्मा को उम्मीदवार बनाकर दीपक प्रकाश का रास्ता ब्लॉक किया।
उपेंद्र कुशवाहा की अपनी पार्टी (RLM) के लिए अतिरिक्त सीट हासिल करने की गेम फिलहाल कम हो गई।
दीपक प्रकाश की नियुक्ति पर शुरुआत से ही एनडीए सरकार पर 'परिवारवाद' के आरोप लग रहे थे।


