व्यापार समझौते में खेती और डेयरी को अलग रखेंगे भारत-कनाडा
Updated on
29-05-2026 02:10 PM
नई दिल्ली: भारत और कनाडा ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर जारी वार्ता में जल्दी सहमति बन सकने वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है जबकि संवेदनशील क्षेत्रों को फिलहाल अलग रखा जाएगा। कनाडा की आधिकारिक यात्रा पर गए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों ने बातचीत को व्यावहारिक बनाए रखने पर सहमति जताई है। सीईपीए पर तीसरे दौर की वार्ता इस समय ओटावा में जारी है।
गोयल ने एक कार्यक्रम में कहा कि जिन मुद्दों को लेकर किसी भी पक्ष को संवेदनशीलता है, उन्हें समझौते में शामिल करने पर जोर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'हमने तय किया है कि बेहतर के चक्कर में अच्छे अवसर नहीं गंवाए जाएंगे। आसान और जल्द परिणाम देने वाले क्षेत्रों पर पहले सहमति बनाई जाएगी।' भारत आम तौर पर ऐसे व्यापार समझौतों में कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों में अपने बाजार तक पहुंच देने से परहेज करता रहा है।
50 अरब डॉलर का लक्ष्य
दोनों देश इस साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। साथ ही, द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 17 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। गोयल ने कहा कि अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग, निवेश कंपनियों, पेंशन कोष और बीमा क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं।उन्होंने कनाडा की कंपनियों से निवेश का आह्वान करते हुए कहा कि भारत बौद्धिक संपदा अधिकारों के संरक्षण के लिए जाना जाता है। भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप परिवेश है, जहां करीब 2.3 लाख पंजीकृत स्टार्टअप हैं। डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को देश की प्रमुख ताकत बताते हुए उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता दिखाई है।
कहां-कहां हैं मौके?
गोयल ने कहा कि एआई, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, कृषि-प्रौद्योगिकी और गहन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं। गोयल की ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी जो टेलर के साथ बैठक में बुनियादी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं, स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी और डिजिटल अर्थव्यवस्था में निवेश अवसरों पर चर्चा हुई।इसके अलावा, सीपीपी इन्वेस्टमेंट्स के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी जॉन ग्राहम के साथ बुनियादी ढांचा, लॉजिस्टिक, नवीकरणीय ऊर्जा, परिवहन, वित्तीय सेवाएं और डिजिटल अवसंरचना में दीर्घकालिक निवेश बढ़ाने पर भी बातचीत हुई।
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