Select Date:

भारत-चीन ने यह बदलाव अपनाने में लगा रखा है दम, बाकी दुनिया बिगाड़ रही ताल, नई रिपोर्ट में चेतावनी

Updated on 20-06-2026 01:20 PM
नई दिल्‍ली: साफ-सुथरी ऊर्जा की ओर दुनिया का झुकाव अब एक ज्‍यादा मुश्किल और अनिश्चित दौर में पहुंच रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, सप्लाई चेन में रुकावटें और एनर्जी सिक्‍योरिटी की चिंताएं इस बदलाव की दिशा को बदल रही हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि भले ही क्‍लीन एनर्जी में निवेश रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। लेकिन, टिकाऊ, सस्ते और मजबूत एनर्जी सिस्‍टम बनाने की रफ्तार धीमी हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अस्थिर ग्‍लोबल माहौल के बीच देश ऊर्जा सुरक्षा को ज्‍यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। रिपोर्ट निवेश की मात्रा और असल में बदलाव के लिए तैयारी के बीच बढ़ते अंतर को उजागर करती है। बदलाव की तैयारी का स्तर एक दशक से ज्‍यादा समय में पहली बार गिरा है।

क्‍यों बदल रही हैं प्राथमिकताएं?

ये नतीजे बढ़ते जियोपॉलिटिकल जोखिमों के बीच सामने आए हैं। इनमें होर्मुज स्‍ट्रेट में हालिया रुकावटें शामिल हैं। यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा चोकपॉइंट्स में से एक है।

रिपोर्ट का कहना है कि ऐसी घटनाओं ने एनर्जी सिस्‍टम्‍स की कमजोरियों को उजागर किया है। ये पहले से ही बिजली की बढ़ती मांग, बुनियादी ढांचे की बाधाओं और पूंजी तक असमान पहुंच के दबाव में हैं। आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाएं इन रुकावटों से सबसे ज्‍यादा प्रभावित हुई हैं।
WEF और एक्‍सेंचर की पार्टनरशिप में तैयार किए गए एनर्जी ट्रांजिशन इंडेक्स (ETI) 2026 के अनुसार, ग्‍लोबल एनर्जी बदलाव असल में रुक गया है। जबकि 2025 में कुल एनर्जी इन्‍वेस्‍टमेंट 3.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया था। इसमें से 2.3 ट्रिलियन डॉलर क्‍लीन एनर्जी प्रोजेक्‍ट्स के लिए था।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में सेंटर फॉर एनर्जी एंड मैटेरियल्स के प्रमुख रॉबर्टो बोक्का ने कहा, 'ऊर्जा बदलाव पीछे नहीं हट रहा है। लेकिन, इसमें बिखराव आ रहा है।'

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश तीन प्रतिस्पर्धी लक्ष्यों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता और किफायतीपन शामिल हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ रही है।

भारत और चीन आगे बढ़ रहे हैं

कुल मिलाकर सुस्ती के बावजूद कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। नॉर्डिक देशों ने रैंकिंग में अपनी बढ़त बनाए रखी, जबकि मजबूत नीतिगत समर्थन और रेगुलेटरी रिफॉर्म्‍स के कारण सिंगापुर तेजी से आगे बढ़ने वाले देशों में से एक बनकर उभरा।
बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में चीन ने क्‍लीन एनर्जी के इस्तेमाल का रिकॉर्ड स्तर बनाए रखा। वहीं, भारत ने बदलाव की तैयारी में सबसे मजबूत सुधारों में से एक दर्ज किया। यह पॉलिसी फ्रेमवर्क, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर और निवेश की स्थितियों में प्रगति को दिखाता है।

उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने चुनौती

रिपोर्ट वैश्विक ऊर्जा निवेश में बढ़ते असंतुलन की ओर इशारा करती है। क्‍लीन एनर्जी के लिए लगभग 75% पूंजी कुछ ही देशों में केंद्रित है, जबकि बिजली की मांग में अनुमानित बढ़ोतरी का लगभग 80% हिस्सा उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आता है।

इस असंतुलन से ग्लोबल डीकार्बोनाइजेशन की रफ्तार धीमी हो सकती है। विकसित और विकासशील देशों के बीच ऊर्जा से जुड़ी असमानताएं बढ़ सकती हैं। इससे एनर्जी ट्रांजिशन के लिए सस्ती फाइनेंसिंग तक पहुंच एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

बिजली की बढ़ती मांग से दबाव

एक और बढ़ती चुनौती बिजली की मांग में तेजी है। यह इलेक्ट्रिफिकेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और कूलिंग की जरूरतों के कारण हो रही है। पिछले साल ग्लोबल बिजली की डिमांड में 3% की बढ़ोतरी हुई। इससे इस बदलाव की रफ्तार बनाए रखने के लिए ग्रिड का विस्तार और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास जरूरी हो गया है।

जैसे-जैसे देश ज्‍यादा डिजिटल टेक्नोलॉजी अपना रहे हैं और उद्योगों व ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बिजली से चलने वाला बना रहे हैं। भरोसेमंद बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत काफी बढ़ने की उम्मीद है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए WEF ने तीन प्राथमिकताएं तय की हैं:
  • ऊर्जा सिस्टम के डिजाइन में मजबूती और सुरक्षा को शामिल करना।
  • ग्रिड और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में तेजी लाना।
  • ऐसा स्थिर पॉलिसी माहौल बनाना जो लंबे समय के निवेश को आकर्षित करे, खासकर उभरते बाजारों में।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि जो देश ऊर्जा सुरक्षा को सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम होंगे, वे बदलते ग्लोबल ऊर्जा परिदृश्य में कॉम्पिटिटिव फायदा उठाने की सबसे अच्छी स्थिति में होंगे, जहां मजबूती भी डीकार्बोनाइजेशन जितनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 05 September 2026
नई दिल्ली: ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई थी और यह 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। शुक्रवार को इंटरनेशनल बेंचमार्क…
 05 September 2026
नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन और जी के फाउंडर सुभाष चंद्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सीबीआई ने चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ…
 05 September 2026
नई दिल्ली: आपने कई बार देखा होगा कि जरूरत पड़ने पर जब किसी बीमा कंपनी से इंश्योरेंस क्लेम (बीमा दावा) किया जाता है तो वह कई बार रिजेक्ट भी हो…
 05 September 2026
नई दिल्‍ली: एग्रीकल्चर एनालिस्ट देविंदर शर्मा ने भारत की कृषि नीति पर नए सिरे से विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि इथेनॉल, फर्टिलाइजर प्रोडक्शन और ट्रेड…
 31 August 2026
नई दिल्ली: देश में करोड़ों की संख्या में लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब फेस्टिव सीजन की शुरुआत भी हो रही है। इसको देखते हुए क्रेडिट कार्ड…
 31 August 2026
नई दिल्ली: देश में कई सारी संस्थाएं और बैंक लोगों को होम लोन की सुविधा देते हैं। इनमें सरकारी और प्राइवेट दोनों ही शामिल हैं। वहीं, आज के समय में…
 31 August 2026
नई दिल्ली: तमिलनाडु की थलपति विजय सरकार ने इस बार धान खरीद में रिकॉर्ड बना दिया है। प्रदेश सरकार की एजेंसियों द्वारा धान की खरीद 2025-26 में रिकॉर्ड 64.2 लाख…
 31 August 2026
नई दिल्ली: दूध से बने पनीर को सब जानते हैं। लेकिन वनस्पतियों से बने Analogue Paneer के बारे में किसी-किसी को पता है। इसे असली पनीर के नाम पर खूब…
 29 August 2026
नई दिल्ली: कल शुक्रवार को मेन बोर्ड से टेम्पसैंस इंस्ट्रूमेंट्स का आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हुआ। इसने लिस्टिंग पर ही निवेशकों को करीब 110 फीसदी मुनाफा दिया। बाद में…
Advt.