'भारत का दौरा चीन पर नजर', दिल्ली आकर ड्रैगन को साध रहे म्यांमार के राष्ट्रपति ह्लाइंग, रेयर अर्थ पर होगा बड़ा फैसला!
Updated on
30-05-2026 02:32 PM
नेपीडा: म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग 30 मई से 2 जून तक आधिकारिक दौरे पर भारत आ रहे हैं। म्यांमार जुंटा प्रमुख से राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय बाद मिन आंग ह्लाइंग शनिवार को भारत के लिए रवाना होंगे। राष्ट्रपति के तौर पर उनका यह पहला विदेश दौरा है। उनकी यात्रा म्यांमार के लिए क्षेत्रीय जुड़ाव की वापसी को दर्शाती है। यह उस घटना के पांच साल बाद हो रही है, जब तख्तापलट के बाद म्यांमार के सैन्य नेतृत्व से पड़ोसी देशों ने दूरी बना ली थी।
रॉयटर्स के मुताबिक, विश्लेषकों का कहना है कि भारत के लिए यह यात्रा म्यांमार पर चीन के अत्यधिक प्रभाव को कम करने का अवसर है। भारत इस यात्रा के जरिए देश में मौजूद महत्वपूर्ण रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) भंडारों तक अपनी पहुंच सुनिश्चित करने और अपनी उत्तर-पूर्वी सीमाओं पर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी काम कर सकता है।
क्राइसिस ग्रुप में म्यांमार मामलों के वरिष्ठ सलाहकार रिचर्ड हॉर्सी का कहना है कि राष्ट्रपति के तौर पर नागरिक वेशभूषा धारण करने के बाद मिन आंग ह्लाइंग पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक जुड़ाव को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें आसियान (ASEAN) के साथ म्यांमार के सामान्य संबंधों की उम्मीद है।
रिचर्ड हॉर्सी ने आगे कहा कि ह्लाइंग जल्दी ही शी जिनपिंग से मिलने के लिए बीजिंग जा सकते हैं। भारत म्यांमार का एक प्रमुख पड़ोसी देश है लेकिन चीन ने म्यांमार में तेजी से प्रभाव बढ़ाया है। ऐसे में ना सिर्फ ह्लाइंग की भारत यात्रा के नतीजों बल्कि चीन पर उनके रुख को लेकर भी एक्सपर्ट की नजर है।
कूटनीतिक रूप से अलग-थलग जुंटा
फरवरी, 2021 के तख्तापलट में मिन आंग ह्लाइंग ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची के नेतृत्व वाली चुनी हुई नागरिक सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इस घटना के बाद विरोध प्रदर्शनों का एक सिलसिला शुरू हो गया, जो बाद में सेना के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी सशस्त्र विद्रोह में बदल गया।
इस तख्तापलट की व्यापक निंदा हुई, जिसमें आसियान (ASEAN) गुट भी शामिल था। आसियान ने म्यांमार के जनरलों को अपने शिखर सम्मेलनों में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके चलते सेना के नेतृत्व वाला नया प्रशासन खुद को कूटनीतिक रूप से लगातार अलग-थलग पाता चला गया।
बीते साल से बदले हालात
म्यांमार में पिछले साल आए एक विनाशकारी भूकंप ने मिन आंग ह्लाइंग के लिए कूटनीतिक अवसर पैदा कर दिया। उन्होंने बैंकॉक में आयोजित एक क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में एक दुर्लभ यात्रा की और अब वे इस अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं। म्यांमार में भारत के पूर्व राजदूत गौतम मुखोपाध्याय का कहना है कि चुनाव के बाद ह्लाइंग क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
म्यांमार में बीजिंग का लंबे समय से समर्थन रहा है और वहां उसके कई निवेश भी हैं। विश्लेषकों का कहना है कि मिन आंग ह्लाइंग का अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत जाना, कुछ हद तक चीन के गहरे प्रभाव का मुकाबला करने की एक कोशिश है। मुखोपाध्याय कहते हैं कि यह भारत और चीन के साथ म्यांमार के व्यवहार का एक हिस्सा रहा है- चीन के सामने झुकना और भारत के साथ संतुलन बनाने की कोशिश।
भारत से मदद मांगेगे मिन!
मिन आंग ह्लाइंग की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब म्यांमार की सेना ने सीमावर्ती इलाके में फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। इस इलाके में रेयर-अर्थ के भंडार पाए जाते हैं। यहीं से भारत तथा थाईलैंड के लिए महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते भी गुज़रते हैं। ऐसे में मिन इन गुटों के खिलाफ भारत से मदद मांग सकते हैं।भारत अपनी तरफ से म्यांमार के संसाधनों तक पहुंचने के तरीके खोजने में दिलचस्पी रखता है। मुखोपाध्याय का कहना है कि भारत की तरफ से इस यात्रा का मुख्य मकसद यह देखना है कि उन्हें इससे कच्चे माल, रेयर अर्थ और व्यावसायिक अवसरों के रूप में क्या मिल सकता है। म्यांमार की सेना भी यही चाहती है क्योंकि वह सैन्य उद्यमों को मजबूत करना चाहती है।
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