अमेरिका-ईरान युद्ध का मारा भारतीय शेयर बाजार, SIF से कैसे मिलेगा निवेशकों को सहारा
Updated on
03-06-2026 05:26 PM
मुंबई: अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से पश्चिम एशिया में शुरू् हुए संकट का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। इसका शिकार भारत शेयर बाजार भी हुए हैं। तभी तो बुधवार को कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 1,157 अंक टूटकर 73,493 अंक तक फिसल गया था। जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 332 नीचे 23,151 के करीब पहुंचा था। हालांकि, कारोबार बंद होते-होते नुकसान की कुछ भरपायी हो गई थी। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए छोटे निवेशक क्या करें?
एसआईएफ से दिखती है आशा
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कुछ समय पहले नई निवेश श्रेणी स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIF) शुरू किया है। यह शेयर बाजार में मध्यम रिटर्न की अवधि से जूझ रहे निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण समाधान के रूप में उभर सकता है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड के कार्यकारी निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी एस. नरेन ने भी इसकी वकालत की है। उन्होंने एक पॉडकॉस्ट में कहा है कि एसआईएफ हाल के वर्षों में म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए सबसे महत्वपूर्ण डेवलपमेंट में से एक है। खासकर ऐसे माहौल में जहां निवेशकों को 2020 और 2024 के बीच के रिटर्न की तरह का रिटर्न देखने को नहीं मिल सकता है।
इस समय क्या है बेहतर?
एस. नरेन ने कहा है कि शुद्ध इक्विटी फंड उन अवधियों के लिए उपयुक्त होते हैं जब बाजार बहुत ज्यादा रिटर्न प्रदान करते हैं। जब बाजार मध्यम रिटर्न के दौर में प्रवेश करते हैं, तो निवेशकों को अन्य श्रेणियों की जरूरत होती है जो जोखिम-समायोजित बेहतर परिणाम उत्पन्न कर सके। सेबी ने जो एसआईएफ ढांचे का निर्माण किया है वह पारंपरिक म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो प्रबंधन उत्पादों के बीच मौजूद अंतर को दूर करता है। उन्होंने साल 2008 और 2013 के बीच की अवधि से तुलना करते हुए बताया है कि जब शेयर बाजारों में निराशाजनक रिटर्न के बीच म्यूचुअल फंड में निवेश कम रहा, तब इंडस्ट्री के पास अब एक ऐसी उत्पाद श्रेणी है जो विशेष रूप से ऐसे वातावरण से निपटने के लिए डिजाइन की गई है।
किनके लिए है एसआईएफ
नरेन ने पॉडकॉस्ट में स्पष्ट रूप से बताया है कि 20% या उससे अधिक वार्षिक रिटर्न की उम्मीद करने वाले निवेशकों के लिए एसआईएफ (SIF) उपयुक्त नहीं है। इसी तरह, पूंजी संरक्षण चाहने वाले निवेशकों को भी इनसे बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “ये फिक्स्ड डिपॉजिट नहीं हैं। निवेशकों को पूंजी संरक्षण की उम्मीद में इन उत्पादों में निवेश नहीं करना चाहिए।” एसआईएफ उन दीर्घकालिक निवेशकों के लिए हैं जो अस्थिरता को समझते हैं। पोर्टफोलियो मूल्य में आवधिक उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हैं और कम से कम 10 लाख रुपये का निवेश करने को तैयार हैं, जो नियमों के तहत निर्धारित न्यूनतम सीमा है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए एसआईएफ विकल्पों में से नरेन ने एक्टिव एसेट एलोकेटर रणनीति को एक विशिष्ट ऑफर के रूप में उजागर किया। पारंपरिक मल्टी-एसेट फंडों के विपरीत, जिन्हें सोने और चांदी जैसी विशिष्ट परिसंपत्ति श्रेणियों में निवेश बनाए रखना अनिवार्य होता है, एक्टिव एसेट एलोकेटर (एसआईएफ) श्रेणी अनिवार्य आवंटन से बंधी नहीं होती है।
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