भारत के हाइडल प्रोजेक्ट हमें चोट पहुंचाने के लिए', PCA में गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, सिंधु जल संधि पर अहम सुनवाई पूरी
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29-04-2026 12:40 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने एक बार फिर सिंधु जल संधि के मुद्दे पर भारत को घेरने की कोशिश की है। भारत की ओर से जम्मू कश्मीर में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स के निर्माण का मुद्दा पाकिस्तान ने परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (PCA) में उठाया है। पाकिस्तान ने कोर्ट से गुहार लगाई कि भारत के इन प्रोजेक्ट का संज्ञान लिया जाए क्योंकि ये उसकी जल सुरक्षा को नुकसान पहुंचाएंगे। पाकिस्तान की दलीलें सुनते हुए पीसीए ने मंगलवार को सिंधु जल संधि (IWT) पर सुनवाई पूरी कर ली है। भारत ने सिंधु संधि पर पीसीए या किसी भी दखल को खारिज किया है।
पीसीए में पाकिस्तान ने भारत के उन अहम प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाया, जो अभी विश्व बैंक की मध्यस्थता संस्थाओं के सामने नहीं हैं। 19 जनवरी को पीसीए को दिए अपने मेमोरियल में पाकिस्तान ने किश्तवाड़ में चिनाब नदी पर बन रहे 624 MW के किरू हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को एक 'केस स्टडी' के तौर पर शामिल किया और किरू में जल भंडारण के अधिकार पर भारत के दावों को 'बेहद बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया' बताया।
कोर्ट में पाकिस्तान की दलील
पाकिस्तान की ओर से 2 फरवरी को पीसीए की सुनवाई में कहा गया कि भारत अपने बड़े प्लांट्स के लिए काफी ज्यादा जल भंडारण के आवंटन का प्रस्ताव दे रहा है। इसमें बगलिहार, दुल हस्ती, किरू और क्वार प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जो बिजली उत्पादन बढ़ाने की भारत की योजनाओं के लिए बेहद अहम हैं।
पाकिस्तानी वकील ने दलील दी कि भारत इन बड़े प्लांट्स के जरिए 'सिस्टम के साथ खिलवाड़' कर रहा है। भारत के इन प्रोजेक्ट का नीचे की ओर स्थित पाकिस्तान पर बहुत खराब असर पड़ेगा। पाकिस्तानी वकीलों ने आरोप लगाया कि भारत की ओर से जानबूझकर उनके देश को नुकसान पहुंचाने के लिए ज्यादा जल भंडारण की कोशिश हो रही है।
भारत पर लगाए आरोप
पाकिस्तान ने 3 फरवरी को कोर्ट में कहा कि पश्चिमी नदियों पर भारत का हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट निर्माण कार्यक्रम 'बहुत बड़ा' है। भारत चिनाब नदी पर 300 MW से ज्यादा क्षमता वाले प्रोजेक्ट्स के जरिए जल भंडारण को ज्यादा से ज्यादा कर रहा है। इसमें खुलेतौर पर सिंधु जल संधि में तय की गई बातों की परवाह नहीं की जा रही है।भारत ने बीते साल अप्रैल में कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। संधि के निलंबित होने के बाद भारत ने कश्मीर में नदियों पर अपने प्रोजेक्ट्स के निर्माण में तेजी लाई है। इसका मकसद इसी साल पूरे होने वाले 1,000 MW के पाकल दुल और 624 MW के किरू प्रोजेक्ट्स के निर्माण में 3-4 महीने की बचत करना है। इसके अलावा 37.5 MW के परनई और 540 MW के क्वार प्रोजेक्ट्स को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
पीसीए के सामने नए मुद्दे
भारत के इन प्रोजेक्ट के डिजाइन या जल भंडारण से जुड़े मुद्दे पीसीए के सामने नहीं हैं। पीसीए मुख्य रूप से किशनगंगा और रातले प्रोजेक्ट से जुड़े पॉन्डेज और डिजाइन के मुद्दों को सुन रहा है। पाकिस्तान ने 'चतुराई' दिखाते हुए धीरे-धीरे उन दूसरे HEPs (जलविद्युत प्रोजेक्ट्स) के उदाहरण इसमें शामिल किए हैं, जिन पर भारत काम कर रहा है।पाकिस्तान ने अपने 81-पेज के नोट में 'किरू केस स्टडी' के लिए एक पूरा सेक्शन समर्पित किया है, जिसमें उसने भारत के पॉन्देज हिस्से के दावों पर सवाल उठाया है। पाकिस्तान ने मांग की है कि पॉन्डेज की गणना करते समय 'पर्यावरणीय प्रवाह' के प्रावधानों को भी ध्यान में रखा जाए ताकि पर्यावरण को होने वाले किसी भी बड़े नुकसान को रोका जा सके।
पाकिस्तान का क्या तर्क है
पाकिस्तान का कहना है कि पॉन्डेज सिर्फ 3.36 Mm3 से 7.72 Mm3 की सीमा में ही रह सकता है। पाकिस्तान कोर्ट से किरू HEP के संबंध में किसी नतीजे पर पहुंचने की मांग नहीं कर रहा है। उसने यह चाहा है कि 'रन ऑफ द रिवर' या एनेक्सचर D 3 जलविद्युत संयंत्रों के लिए अधिकतम पॉन्डेज की गणना करते समय इन चिंताओं को ध्यान में रखा जाए।पकिस्तानी वकीलों का कहना है कि पॉन्डेज और अनुमानों के बारे में भारत की ओर से साझा किया गया सीमित डेटा कबूल नहीं किए जा सकते हैं, जैसा कि किरू HEP के संबंध में दिखाया गया है। खास बात यह है कि भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़ी पीसीए की कार्यवाही का बहिष्कार किया है। इसके बावजूद पाकिस्तान इन मंचों पर अपनी बात रख रहा है।
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