प्रदेश में 35 हजार से ज्यादा घरों में पीएनजी कनेक्शन देकर मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन गैस सप्लाई सिर्फ करीब एक हजार घरों में शुरू हुई है। यानी कनेक्शन लेने वाले 3% से भी कम उपभोक्ता पीएनजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कंपनियों के मुताबिक, पीएनजी सप्लाई शुरू होने के बाद तय अवधि में उसी पते का एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना पड़ता है। अधिकांश उपभोक्ता इसी शर्त के कारण सप्लाई शुरू नहीं करा रहे। उन्हें आशंका है कि पाइपलाइन से गैस बंद हुई तो वैकल्पिक सिलेंडर नहीं रहेगा। हालांकि, दूसरा मकान होने पर एलपीजी कनेक्शन उस पते पर ट्रांसफर कराया जा सकता है।
किराएदारों की चिंता-मकान बदला तो कनेक्शन छूट जाएगा
पीएनजी को लेकर किराएदारों के सामने अलग समस्या है। मकान बदलने पर पाइपलाइन और मीटर वहीं रह जाएंगे, जबकि एलपीजी सिलेंडर नए पते पर आसानी से ले जाया जा सकता है। पीएनजी की पाइपलाइन स्थायी रूप से रसोई और चूल्हे से जुड़ी होती है। इसलिए बार-बार मकान बदलने वाले परिवार सिलेंडर को ज्यादा सुविधाजनक मान रहे हैं।
सरगुजा संभाग में अभी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा
बीपीसीएल के रीजनल प्रोजेक्ट मैनेजर ढोबा परिदा ने बताया कि मध्यप्रदेश के शहडोल से करीब 214 किमी लंबी पाइपलाइन लाई जा रही है। कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा में पहाड़ काटकर पाइपलाइन बिछाई जा रही है।
इसके लिए कई स्तरों पर मंजूरी लेनी पड़ रही है। शहरी गैस वितरण नीति-2026 लागू होने के बाद अनुमतियां आसानी से मिल रही हैं और काम में तेजी आई है। इन जिलों में फिलहाल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है। घरेलू कनेक्शन देना शुरू नहीं हुआ है।
लक्ष्य 10 लाख घर, रायपुर में 1 लाख कनेक्शन की योजना
राज्य की सिटी गैस वितरण नीति लागू होने के बाद पीएनजी नेटवर्क के विस्तार में तेजी आई है। प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा घरेलू कनेक्शन देने का लक्ष्य है। रायपुर में ही करीब एक लाख घरों तक नेटवर्क पहुंचाया जाना है। फिलहाल रायपुर, दुर्ग-भिलाई, बिलासपुर, अंबिकापुर, मनेंद्रगढ़, रायगढ़, राजनांदगांव, जगदलपुर और कोरबा समेत प्रमुख शहरों पर फोकस है।
रायपुर के भनपुरी, टाटीबंध, सरोना, फाफाडीह और अवंति विहार की कुछ कॉलोनियों में सप्लाई शुरू हो चुकी है। बिलासपुर, रायगढ़, बलौदाबाजार और जांजगीर-चांपा समेत अन्य क्षेत्रों में नेटवर्क बिछाया जा रहा है।