अभियान के तहत अब तक 802 लोगों से पूछताछ कर उनका डिजिटल डोजियर तैयार किया गया है। इनमें 597 पुरुष, 180 महिलाएं, 21 बालक और 4 बालिकाएं शामिल हैं। जीआरपी हर व्यक्ति का फोटो, पता, पारिवारिक जानकारी और अन्य जरूरी विवरण डिजिटल रूप से दर्ज कर रही है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान और सहायता आसानी से की जा सके।
आपरेशन हमदर्द के तहत अब तक 50 लोगों को काउंसलिंग के बाद परिवार से मिलाया गया, जबकि 25 को शेल्टर होम और वृद्धाश्रम भेजा गया। अन्य लोगों को घर लौटने की समझाइश दी गई और जरूरतमंदों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
केस-1 भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-6 के बाहर एक ऑटो में करीब एक माह की बच्ची लावारिस हालत में मिली। मामले की सूचना मिलते ही जीआरपी ने बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया और सुक्षारर्थ किलकारी संस्था में रखा गया है। अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
केस-2 ग्वालियर स्टेशन पर महोबा से लौट रहे दो भाई-बहन पिता के मोबाइल चार्जर लेने बाहर जाने पर बिछड़ गए। बच्चों को रोता देख जीआरपी ने सुरक्षित संरक्षण में लिया और तलाश के बाद उनके पिता को खोजकर दोनों को सकुशल परिवार से मिला दिया।
केस-3 विदिशा रेलवे स्टेशन पर करीब 60 वर्षीय महिला पिछले दो वर्षों से भीख मांगकर जीवन गुजार रही थी। जीआरपी ने उसकी पहचान कर उसके बेटे से संपर्क किया। दोनों की काउंसलिंग की गई और परिवार की सहमति से महिला को उसके बेटे के साथ घर भेज दिया गया।
केस-4 इंदौर स्टेशन पर लंबे समय से रह रहे 78 वर्षीय उधमदास (कोटा, राजस्थान) की जीआरपी ने काउंसलिंग की। उनकी सहमति पर उन्हें आशांजलि वृद्धाश्रम भेजा गया। अन्य लोगों का रिकॉर्ड बनाकर भिक्षावृत्ति और नशा छोड़कर घर लौटने की समझाइश दी गई।