नीरज ने कहा कि वे साधारण लोग हैं और उन्हें कुछ और बनाने की कोशिश न की जाए। उन्होंने मीडिया के कुछ वर्गों द्वारा बनाई गई झूठी कहानियों पर भी निराशा व्यक्त की। नीरज ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि वह बोलते नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि ये कहानियां सच हैं। नीरज ने यह भी कहा कि उन्हें यह समझने में मुश्किल होती है कि लोग कैसे अपनी राय बदल लेते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि एक साल पहले जब उनकी मां ने एक साधारण टिप्पणी की थी, तो लोगों ने उनकी खूब तारीफ की थी। लेकिन आज वही लोग उनकी मां को उसी टिप्पणी के लिए निशाना बना रहे हैं। नीरज ने कहा- मैं इस बीच यह सुनिश्चित करने के लिए और भी कड़ी मेहनत करूंगा कि दुनिया भारत को याद रखे और सभी सही कारणों से इसे ईर्ष्या और सम्मान के साथ देखे।


