हिंद महासागर में मौजूदगी बढ़ाने को बेचैन पाकिस्तान, बोला- यहीं तय होगा युद्ध का भविष्य, भारत की बढ़ेगी टेंशन
Updated on
24-04-2026 05:25 PM
इस्लामाबाद: पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख एडमिरल नवीद अशरफ ने हिंद महासागर को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तानी नौसेना हिंद महासागर में अपनी उपस्थिति बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में अपने विशाल योगदान के कारण हिंद महासागर में युद्ध का भविष्य आकार ले रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा की कीमतों पर काफी असर पड़ सकता है। पाकिस्तानी नौसेना प्रमुख का यह बयान तब आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में अगर पाकिस्तानी नौसेना हिंद महासागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाती है तो इससे भारत के लिए खतरा बढ़ सकता है।
पाकिस्तानी सेना के प्रोपगैंडा विंग इंटर-सर्विसेज़ पब्लिक रिलेशंस (ISPR) के जारी बयान में कहा गया, नौसेना प्रमुख ने कराची में मैरीटाइम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (MCE) द्वारा आयोजित दो-दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन "उभरती प्रौद्योगिकियां और भविष्य का युद्ध" के समापन पर यह बयान दिया। इस सम्मेलन में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इस सम्मेलन का उद्देश्य समुद्री विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना था, ताकि वे बदलते भू-रणनीतिक रुझानों और आधुनिक युद्ध पर प्रौद्योगिकी के प्रभाव पर चर्चा कर सकें।
स्वदेशीकरण पर जोर दे रही पाकिस्तानी नौसेना
प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, एडमिरल अशरफ ने इनोवेशन, अनुकूलनशीलता और ऑपरेशनल प्रासंगिकता को बढ़ावा देने के लिए उद्योग, अंतिम-उपयोगकर्ताओं और शिक्षाविदों के बीच घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "इस तरह का सहयोग स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा, जिससे पाकिस्तान के लिए एक लागत-प्रभावी और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में मदद मिलेगी, जिसमें निर्यात की भी क्षमता होगी।"
पाक नौसेना प्रमुख ने क्या चेतावनी दी
हिंद महासागर के रणनीतिक महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने दोहराया कि यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार प्रवाह के लिए केंद्रीय है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की रुकावट का इससे जुड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर दूरगामी परिणाम हो सकता है। सम्मेलन में उन्नत प्रौद्योगिकियों के नागरिक और सैन्य अनुप्रयोगों के बीच तेजी से धुंधली होती सीमाओं पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने यह बताया गया कि यह रुझान पाकिस्तान के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अवसर और चुनौतियां, दोनों प्रस्तुत करता है। प्रतिभागियों ने चर्चा की कि कैसे तेजी से हो रहे तकनीकी विकास परिचालन अवधारणाओं, बल संरचनाओं और परिणामों को नया रूप देकर युद्ध के स्वरूप को बदल रहे हैं।
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