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बंगाल की खाड़ी में हंगोर सबमरीन को भेजने की तैयारी में पाकिस्‍तान, क्‍या मदद करेगा बांग्‍लादेश? समझें खतरा

Updated on 20-06-2026 01:14 PM
इस्लामाबाद/ढाका: पाकिस्तान की नौसेना ने संकेत दिए हैं वो 1971 की जंग के बाद पहली बार बंगाल की खाड़ी में अपनी पनडुब्बी भेज सकता है। ये सीधे तौर पर भारत के दबदबे वाले समंदर में भारतीय नौसेना को चुनौती देने की कोशिश होगी। पाकिस्तान जिस PNS हंगोर पनडुब्बी को बंगाल की खाड़ी में भेजने की योजना बना रहा है उसे चीन ने पिछले महीने ही पाकिस्तान नौसेना को सौंपा है। पाकिस्तान चीन से 8 पनडुब्बियां खरीद रहा है जिनमें से पहली पनडुब्बी पाकिस्तान की नौसेना को पिछले महीने चीन ने सौंप दी है।

PNS हंगोर एडवांस्ड टेक्नोलॉजी वाली पनडुब्बी है जिसमें AIP तकनीक होने की उम्मीद है। पाकिस्तानी नौसेना के कमोडोर उमर फारूक ने कोलंबो में इस पनडुब्बी को गेमचेंजर बताते हुए कहा था कि हंगोर-क्लास की पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम हो जाएगा। अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो 1971 के बाद पहली बार होगा जब पाकिस्तानी नौसेना की पनडुबब्बी बंगाल करी खाड़ी में दाखिल होगी। ये सीधे सीधे भारतीय नौसेना के वर्चस्व को चुनौती देना होगा।

बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तानी पनडुब्बी, भारत को चुनौती?

बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की हंगोर क्लास पनडुब्बी का पहुंचना भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चुनौती माना जाएगा जो 1971 के युद्ध के बाद पहली बार इस क्षेत्र में पाकिस्तान की सैन्य मौजूदगी को दर्ज करेगा।

  • भारतीय नौसेना के खिलाफ टू फ्रंट चुनौती- भारतीय नौसेना का अभी तक पाकिस्तानी नौसेना का मुकाबला सिर्फ अरब सागर (पश्चिमी तट) पर करना पड़ता था। बंगाल की खाड़ी में हंगोर क्लास की तैनाती से भारत को अपने पूर्वी नौसैनिक कमान (विशाखापत्तनम) और अंडमान-निकोबार कमान की सुरक्षा के लिए अपनी पनडुब्बी-रोधी संपत्तियों को वहां स्थायी रूप से तैनात करना होगा।
  • चीन-पाकिस्तान की एक रणनीति- सुरक्षा विश्लेषक इसे चीन की 'स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स' के हिस्से के रूप में देखते हैं। चूंकि हंगोर क्लास चीनी तकनीक (Type 039A युआन क्लास) पर आधारित है इसलिए चीन और पाकिस्तान मिलकर भारत के पूर्वी समुद्री तट पर खुफिया जानकारी साझा कर सकते हैं।
  • चीन-पाकिस्तान के खेमे में बांग्लादेश- बांग्लादेश अब खुलकर पाकिस्तान और चीन के खेमे में खड़ा दिखाई देता है। देश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान भी पहले विदेश दौरे पर चीन ही जा रहे हैं। जहां वो बांग्लादेशी बंदरगाहों के लिए चीनी फंड हासिल करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में पाकिस्तान और चीन, बांग्लादेश के बंदरगाहों का उपयोग करके बंगाल की खाड़ी में अपने लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं।

पाकिस्तानी पनडुब्बी से भारत को कितना खतरा?

  • हंगोर की AIP तकनीक- यह पनडुब्बी AIP (Air-Independent Propulsion) तकनीक से लैस है जिससे यह बिना सतह पर आए हफ्तों तक पानी के नीचे छिपकर रह सकती है। भारत की कलवरी क्लास (स्कॉर्पीन) पनडुब्बियों में फिलहाल इन-बिल्ट AIP नहीं है जिससे हंगोर को पानी के नीचे छिपे रहने की अधिक क्षमता मिलती है।
  • क्रूज मिसाइल से लैस है हंगोर- रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पनडुब्बी बाबर-3 सबसोनिक क्रूज मिसाइल दागने में सक्षम है जिसकी मारक क्षमता 450 किमी है। विशेषज्ञ इसे पाकिस्तान की 'सेकंड-स्ट्राइक' परमाणु क्षमता का हिस्सा मानते हैं। हालांकि पाकिस्तान इस क्षमता को अभी हासिल नहीं कर पाया है लेकिन वो लगातार कोशिश कर रहा है।
  • अंडमान और मिसाइल टेस्ट रेंज को खतरा- ओडिशा के व्हीलर द्वीप (डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप) पर भारत का मुख्य मिसाइल परीक्षण केंद्र है। बंगाल की खाड़ी में इस पनडुब्बी की मौजूदगी से भारत के गुप्त मिसाइल परीक्षणों जैसे अग्नि और के-सीरीज मिसाइलें की जासूसी का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाएगा।
  • व्यापारिक मार्गों की नाकेबंदी का खतरा- बंगाल की खाड़ी से होकर भारत के ज्यादातर समुद्री व्यापार और मलक्का जलडमरूमध्य का रूट गुजरता है। युद्ध की स्थिति में हंगोर क्लास भारतीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बना सकती है।

पाकिस्तान ने इस पनडुब्बी का नाम PNS हंगोर जानबूझकर भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए रखा है। 1971 के युद्ध के दौरान पुरानी 'PNS हंगोर' ने भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS खुकरी को डुबो दिया था। पाकिस्तान ऐसा करके साइकोलॉजिकल गेम खेल रहा है। हालांकि भारत पाकिस्तान के इस खतरे से निपटने में सक्षम है

भारत कैसे कर सकता है PNS हंगोर का मुकाबला?

भारतीय नौसेना की क्षमता पाकिस्तान की नौसेना के मुकाबले काफी ज्यादा है। भारतीय नौसेना के तरकश में कई ऐसे हथियार हैं जिससे पाकिस्तान के इस खतरे को काफी आसानी से खत्म किया जा सकता है। PNS हंगोर के आने से पहले पाकिस्तान नौसेना पांच पनडुब्बियों का संचालन करती थी। चीन में बनी हंगोर-क्लास की नई पनडुब्बियों का मकसद पाकिस्तान की पुरानी हो चुकी अगोस्टा पनडुब्बियों की जगह लेना है। पाकिस्तान की नई रणनीति में पनडुब्बियों की क्षमता को बढ़ाना है और भारतीय नौसेना इस रणनीति से वाकिफ है।
  • P-8I पोसायडन एयरक्राफ्ट- भारत के पास लंबी दूरी के पनडुब्बी-रोधी टोही विमान हैं जो बंगाल की खाड़ी में किसी भी पाकिस्तानी या चीनी पनडुब्बी को आसानी से ट्रैक कर सकते हैं।
  • परमाणु पनडुब्बियां (SSN/SSBN)- भारत के पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां जैसे अरिहंत क्लास हैं जो आकार और मारक क्षमता में पारंपरिक हंगोर क्लास पनडुब्बियों के मुकाबले काफी ताकतवर हैं।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऐसा नहीं है कि ये पनडुब्बियां भारत के खिलाफ 'युद्ध को पलट देंगी' लेकिन हां एक चुौनीत जरूर हैं। भारत के पास कई एंटी-पनडुब्बी क्षमताएं हैं जो पाकिस्तानी पनडुब्बी को लगातार ट्रैक कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मार सकते हैं।

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