उन्होंने यह भी कहा कि जब महिलाएं कई क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रही हैं, तो यह बिल्कुल सही है कि विधायी संस्थाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़े। भारत की बेटियों से उस चीज के लिए हमेशा इंतजार करने को नहीं कहा जा सकता, जो उनका हक है।
X पर एक पोस्ट में मोदी ने लिखा- “यहां भारत की 'नारी शक्ति' के नाम मेरा पत्र है, जिसमें मैं उस वादे को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता दोहरा रहा हूं, जो दशकों से लंबित था। मैंने अपने साथी नागरिकों के साथ उस संकल्प को जल्द ही साकार करने के विषय पर अपने विचार साझा किए हैं।”
पीएम मोदी का लेटर 3 पॉइंट्स में
महिला आरक्षण संशोधन बिल पर एक नजर
सितंबर 2023 में संसद ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पास किया गया था, जिसे आम तौर पर 'महिला आरक्षण अधिनियम' के नाम से जाना जाता है। यह विधायी संस्थाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम था। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था।
मौजूदा कानून के तहत, महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जुड़ा हुआ था।
इसे 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू करने के लिए, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' में बदलाव की जरूरत थी; इसलिए, सरकार कानून में संशोधनों को पारित करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित कर रही है।
संसद सत्र में संशोधन पास होने पर क्या होगा
सरकार ने दो बड़े संशोधनों की योजना बनाई है, जिसमें एक अलग परिसीमन विधेयक भी शामिल है। महिलाओं के लिए रिजर्वेशन तय करने के लिए इन दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के तौर पर पारित किया जाना जरूरी है। मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए, OBC आरक्षण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि SC/ST आरक्षण पहले की तरह ही जारी रहेगा।
जब 'महिला आरक्षण अधिनियम' में संशोधन पास हो जाएंगे तो यह सुनिश्चित होगा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान 2023 में संविधान में संशोधन करके लाया गया था।