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रुपये को बचाने के चक्कर में चमकी RBI की किस्मत, 53 अरब डॉलर बेचकर तिजोरी में आए 50000 करोड़

Updated on 23-05-2026 02:33 PM
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ( RBI ) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में रुपये की विनिमय दर (एक्सचेंज रेट) में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए डॉलर की बिक्री में भारी बढ़ोतरी की है। इस दौरान केंद्रीय बैंक ने पूरे वित्त वर्ष में कुल 53.1 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री की। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में हुई 41.1 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री के मुकाबले 12 अरब डॉलर अधिक है।

डॉलर की बिक्री से बंपर मुनाफा

बैंकरों के अनुमान के मुताबिक, आरबीआई ने डॉलर की इस बिक्री से कम से कम 10% का मुनाफा कमाया है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि ये डॉलर तब खरीदे गए थे जब रुपये की स्थिति काफी मजबूत थी।
  • इस विदेशी मुद्रा हस्तक्षेप के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में आरबीआई की कुल आय में करीब 50,000 करोड़ रुपये का योगदान सिर्फ डॉलर बेचने से आया है।
  • विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) से डॉलर की इस भारी बिकवाली के असर को सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी ने काफी हद तक संभाल लिया।

आखिरी महीनों में दिखी आक्रामक रणनीति

वित्त वर्ष 2025-26 के आखिरी महीनों में आरबीआई का रुख काफी आक्रामक और रणनीतिक रहा। इस दौरान केंद्रीय बैंक ने कई फैसले लिए। इनमें कुछ इस प्रकार हैं:
  • आरबीआई ने मार्च 2026 में बाजार में भारी मात्रा में डॉलर बेचे और 9.8 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री दर्ज की।
  • फरवरी 2026 मार्च के बिल्कुल उलट था। इस दौरान केंद्रीय बैंक ने डॉलर को बाजार से सोखते हुए *7.4 अरब डॉलर की शुद्ध खरीद की थी।

दो वर्षों का रेकॉर्ड

पिछले दो वर्षों में डॉलर की सबसे बड़ी मासिक शुद्ध बिक्री नवंबर 2024 में हुई थी, जब आरबीआई ने बाजार में 20.2 अरब डॉलर झोंक दिए थे। वहीं, FY26 का उच्चतम बिक्री महीना अक्टूबर 2025 रहा, जिसमें 11.9 अरब डॉलर बेचे गए। आरबीआई ने डॉलर जमा करने में सबसे ज्यादा दिलचस्पी मार्च 2025 में दिखाई थी। उस समय रेकॉर्ड 14.7 अरब डॉलर की शुद्ध खरीद की गई थी।

RBI के दखल से मजबूत हुआ रुपया

आरबीआई के इस हस्तक्षेप और 5 अरब डॉलर के स्वैप के ऐलान के चलते शुक्रवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में रुपया मजबूत हुआ। रुपया 51 पैसे की बढ़त के साथ 95.69 के स्तर पर बंद हुआ। गुरुवार को भी रुपये में 62 पैसे की मजबूती देखी गई थी, जिससे इस हफ्ते की शुरुआत में हुए नुकसान की भरपाई हो गई। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तेजी और अमेरिका-इरान शांति वार्ता में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय मुद्रा को आरबीआई के इस कदम से मजबूत सहारा मिला।

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