'भारत के साथ बराबरी पर हों रिश्ते', बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी चीफ का बड़ा बयान, कहा- तीस्ता हमारा मामला
Updated on
02-07-2026 12:23 PM
ढाका: बांग्लादेश में विपक्ष के नेता और कट्टर इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने भारत के साथ रिश्तों पर बयान दिया है। जमात-ए-इस्लामी नेता ने कहा कि बांग्लादेश, भारत के साथ भरोसे, बराबरी और आपसी सम्मान के आधार पर रिश्ते बनाना चाहता है। रहमान ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में यह बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि तीस्ता मास्टर प्लान समेत ढाका के घरेलू प्रोजेक्ट्स पूरी तरह उसके अधिकार क्षेत्र में होने चाहिए। इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट पर भारत की चिंताओं पर भी बात की।
भारत को बताया करीबी पड़ोसी
ढाका स्थित बांग्लादेश के संसद भवन में रहमान ने कहा, 'भारत हमारा सबसे करीबी पड़ोसी है। हम हमेशा अपने पड़ोसियों का सम्मान करते हैं। न सिर्फ भारत का, बल्कि सभी पड़ोसियों का। हम भी उनसे आपसी सम्मान की उम्मीद करते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "हम भरोसे, बराबरी और सम्मान पर आधारित आपसी रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं।"
जमात चीफ ने तीस्ता प्रोजेक्ट पर क्या कहा?
उन्होंने तीस्ता प्रोजेक्ट को बांग्लादेश का घरेलू मामला बताया और कहा कि देश अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब से इस पहल पर आगे बढ़ेगा। रहमान ने तीस्ता प्रोजेक्ट को लेकर पार्टी की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इससे किसी को दुखी होने की कोई वजह नहीं है। उन्होंने इस मामले पर हमारा रुख सकारात्मक और मजबूत है। हम अपने देश की भलाई के लिए अपना प्लान लागू करेंगे। हमारे दोस्त खुश होंगे, दुखी होने की कोई वजह नहीं है। अगर कोई नाराज होता है, तो हम उन्हें राजशाही के आम भेजकर खुश करने की कोशिश करेंगे।
तीस्ता प्रोजेक्ट चीन को देने की तैयारी
जमात चीफ की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार तीस्ता नदी के प्रबंधन के लिए मास्टर प्लान पर चीन के साथ बढ़ने की तैयारी कर रही है। इस प्रोजेक्ट ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का हालिया चीन यात्रा के दौरान ध्यान खींचा, जब ढाका ने बीजिंग के साथ संभावित सहयोग पर चर्चा की।
तीस्ता नदी पूर्वी हिमालय से निकलती है और सिक्किम, पश्चिम बंगाल से होते हुए बांग्लादेश में प्रवेश करती है। नदी के पानी के बंटवारे और प्रबंधन को लेकर दोनों देश लंबे समय से बातचीत करते रहे हैं। इसके पहले पूर्ववर्ती शेख हसीना सरकार ने तीस्ता नदी प्रोजेक्ट पर भारत के साथ काम करने की इच्छा जताई थी। लेकिन कुछ दिनों बाद ही अगस्त 2024 में उनकी सरकार को छात्र विद्रोह के चलते पतन हो गया।
तीस्ता प्रोजेक्ट पर भारत की चिंता
शेख हसीना के बाद आई मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार और अब तारिक रहमान की पूर्ण बहुमत वाली सरकार ने चीन के साथ दिलचस्पी दिखाई है। इस प्रोजेक्ट के चीन के हाथों में जाने को लेकर भारत ने चिंता जताई है, क्योंकि यह सिलीगुड़ी कॉरिडोर के पास स्थित है। यह भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है। इसे चिकेन नेक के नाम से भी जाना जाता है।
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