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दिल्ली दरबार में कांग्रेस जिलाध्यक्षों का रिपोर्ट कार्ड, कमजोर प्रदर्शन वालों पर गिरेगी गाज

Updated on 04-08-2026 06:56 PM

 कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत मध्य प्रदेश में पिछले वर्ष अगस्त में नियुक्त किए गए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के प्रदर्शन की अब केंद्रीय स्तर पर समीक्षा शुरू हो गई है। मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश संगठन की कार्यप्रणाली का आकलन किया जाएगा।

समीक्षा के आधार पर कई जिलाध्यक्षों की जिम्मेदारियां तय होंगी, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई भी संभव मानी जा रही है।

दिल्ली में दो चरणों में होगी संगठन की समीक्षा

कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल समीक्षा बैठक की अगुवाई करेंगे। पहले चरण में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के साथ संगठन की स्थिति पर चर्चा होगी। इसके बाद दूसरे चरण में जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ अलग-अलग बातचीत कर उनके कामकाज का मूल्यांकन किया जाएगा।

चार श्रेणियों में बांटे गए जिलाध्यक्ष

  • प्रदेश संगठन की रिपोर्ट के आधार पर जिला अध्यक्षों को ए, बी, सी और डी श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। यह वर्गीकरण संगठन विस्तार, सक्रियता और अभियान के क्रियान्वयन जैसे मानकों को ध्यान में रखकर किया गया है।
  • सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ए श्रेणी के जिला अध्यक्षों को इस बैठक में नहीं बुलाया गया है। इनसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी अलग से मुलाकात करेंगे और आगामी दिनों में उन्हें दिल्ली बुलाया जाएगा।
  • बी श्रेणी के जिला अध्यक्ष समीक्षा बैठक में शामिल होंगे। उन्हें उनके प्रदर्शन का फीडबैक दिया जाएगा और संगठनात्मक कार्यों में सुधार कर ए श्रेणी तक पहुंचने का लक्ष्य सौंपा जाएगा।
  • सी श्रेणी के अध्यक्षों को अंतिम अवसर दिया जाएगा। समीक्षा के बाद उन्हें तय समयसीमा के भीतर संगठनात्मक गतिविधियों में सुधार करने के निर्देश मिलेंगे। यदि निर्धारित अवधि में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई तो आगे कार्रवाई की जा सकती है।

डी श्रेणी के अध्यक्षों पर गिर सकती है गाज

  • सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले डी श्रेणी के जिला अध्यक्षों की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार इस श्रेणी में करीब दस जिला अध्यक्ष शामिल हैं। समीक्षा बैठक के बाद इन्हें पद से हटाने के आदेश कभी भी जारी किए जा सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे जिलाध्यक्ष भी हैं जिनके क्षेत्रों में संगठन सृजन अभियान अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका।

  • प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि संगठन को आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यह समीक्षा प्रक्रिया शुरू की गई है। बैठक के निष्कर्षों के आधार पर प्रदेश संगठन में आगे और बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।

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