भारत के दुश्मन पाकिस्तान को रूस का बड़ा ऑफर, लेकिन शहबाज की एक शर्त बिगाड़ सकती है खेल, जानें
Updated on
04-07-2024 11:23 AM
अस्ताना: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मौके पर अस्ताना में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के साथ मीटिंग की। इस दौरान पाकिस्तान को कच्चे तेल सहित ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने की पेशकश की। हालांकि सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान आयात करने में सक्षम है, क्योंकि उसका विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है। पुतिन और शहबाज शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कजाकिस्तान में हैं और यह उनकी दूसरी मुलाकात है। इससे पहले दोनों नेता 2022 में एससीओ समिट के दौरान समरकंद में मिले थे। पाकिस्तान हमेशा चाहता है कि उसकी विदेश नीति में भी भारत की तरह विविधता रहे। लेकिन जब भी वह रूस से संबंध बढ़ाने लगता है तो उसे पश्चिम का दबाव झेलना पड़ता है।
पिछले साल जून में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत पाकिस्तान को रूसी कच्चे तेल की खेप मिली थी। पाकिस्तानी पीएम ने तब अपनी जनता को बताया था कि जिस तरह भारत को डिस्काउंट रेट पर कच्चा तेल मिलता है उसी के आधार पर अब उन्हें भी रूस कच्चा तेल मिलेगा। हालांकि पहले शिपमेंट के बाद कोई भी कच्चा तेल पाकिस्तान को नहीं मिला। ऐसा इसलिए क्योंकि बाद में यह साफ हो गया कि रूस ने पाकिस्तान को किसी भी तरह का डिस्काउंट नहीं दिया था।
रूस-पाकिस्तान के बीच होगा व्यापार?
बुधवार को शहबाज शरीफ के साथ पुतिन ने पाकिस्तान को और भी अधिक ऊर्जा आपूर्ति की संभावना पर चर्चा की। पुतिन ने शहबाज से कहा, 'मैं विशेष रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों पर जोर देना चाहूंगा। ऊर्जा और कृषि-औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग। हमने पाकिस्तान को ऊर्जा संसाधनों की आपूर्ति शुरू कर दी है और हम इस आपूर्ति को और बढ़ाने को तैयार हैं।' पुतिन ने कहा, 'आपके अनुरोध के अनुसार, रूस पाकिस्तानी बाजार में अनाज की आपूर्ति बढ़ाकर पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा का समर्थन कर रहा है।' हालांकि रूस अगर पाकिस्तान को ऊर्जा दे भी दे तो भी पाकिस्तान के लिए उसे पेमेंट करना मुश्किल हो जाएगा। इसका असली कारण अमेरिका के प्रतिबंध नहीं बल्कि पाकिस्तान की कंगाली है।
पाकिस्तान कर पाएगा पेमेंट?
दरअसल पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 8.9 बिलियन डॉलर के करीब है। इसमें से एक बड़ा धन ऐसा है जो दूसरे देशों से लिया गया है, जिसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। वहीं पाकिस्तान का ज्यादातर विदेशी मुद्रा भंडार कर्जे लौटाने के कारण कम हो रहा है। यही कारण है कि शहबाज ने इस दौरान रूस के साथ 1 बिलियन डॉलर के ट्रेड के लिए वस्तु विनिमय की पेशकश की है। वस्तु विनिमय में सामान के बदले सामान दिया जाता है। शहबाज ने कहा, 'साल 1950, 1960 और 1970 के दशक के दौरान हमारा वस्तु विनिमय के तहत द्विपक्षीय व्यापार था। हम सोवियत संघ से बहुत सारी मशीनरी और सामान आयात करते थे और हम आपके देश में कपड़ा और चमड़े का सामान निर्यात करते थे। यह वस्तु विनिमय के तहत होता था।' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे लगता है कि वित्तीय और बैंकिंग मुद्दों से निपटने के लिए आज एक बार फिर वस्तु विनिमय के तहत व्यापार का समय आ गया है। यह पाकिस्तान के लिए बहुत फायदेमंद होगा।' हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रूस इसके लिए तैयार नहीं होने वाला।
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