मक्का समझौते पर उठ रहे सवाल
हूती विद्रोही सऊदी अरब के नागरिक और आर्थिक ठिकानों पर लगातार हमले कर रहे हैं। इन हमलों ने 7 अगस्त को हुए मक्का समझौते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान, सऊदी और तु्की के बीच हुए रक्षा समझौते में कहा गया है कि तीनों में से किसी पर हमला तीनों पर आक्रमण माना जाएगा। लेकिन अब तक न तो पाकिस्तान और न ही तुर्की ने सऊदी अरब को सैन्य मदद की बात कही है।पिछले सप्ताह पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह जरूर कहा कि सऊदी अरब पर हमले से यह समझौता लागू हो सकता है। लेकिन उसके बाद से इस्लामाबाद ने इस बात पर जोर दिया है कि यह समझौता मुख्य रूप से बचाव के लिए है और पाकिस्तानी सेना आक्रामक सैन्य अभियान में शामिल नहीं होगी। इस बात से रियाद में नाराजगी की खबर है। ऐसी रिपोर्ट भी हैं कि पाकिस्तान से धोखा मिलने के बाद रियाद ने हूतियों को रोकने के लिए इजरायल से सहायता की मांग की है। इसके लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जरिए संदेश पहुंचाया गया है।


