शनिवार सुबह नौ बजे एनजीटी कमेटी, पर्यावरण विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में ड्रोन मैपिंग शुरू होगी। जानकारी के अनुसार भदभदा को शुरुआती केंद्र इसलिए चुना गया है, क्योंकि यहां से पानी कलियासोत में जाता है। सर्वे में राजस्व, नगर निगम, जल संसाधन, वन विभाग, एमपीपीसीबी सहित अन्य विभागों के अधिकारी शामिल रहेंगे।
नो फ्लाई जोन में ड्रोन उड़ाने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मिल चुकी है। सर्वे में आधुनिक ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, जियो-टैगिंग, पुराने मुनार-पिलर, वीडियोग्राफी और ग्राउंड ट्रुथिंग का इस्तेमाल होगा। तालाब इस समय फुल टैंक लेवल पर है, इसलिए जलस्तर के आधार पर वास्तविक सीमा का सटीक आकलन किया जाएगा।
इस बार अवैध निर्माणों की जांच वेटलैंड रूल्स-2022 नहीं, बल्कि 2017 के नियमों के आधार पर होगी। नई सीमा तय होने के बाद शहरी क्षेत्र में एफटीएल से 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 250 मीटर तक स्थायी-अस्थायी निर्माण प्रतिबंधित रहेगा। वेटलैंड, बफर और प्रभाव क्षेत्र में नियम विरुद्ध निर्माणों को तीन माह में हटाने की कार्रवाई होगी।
एनजीटी की कमेटी में पर्यावरण मंत्रालय, सीपीसीबी, मैनिट, वन विभाग, राज्य वेटलैंड अथारिटी, जल संसाधन विभाग और एमपीपीसीबी के विशेषज्ञ शामिल हैं। एमपीपीसीबी नोडल एजेंसी रहेगी। वहीं, नियम विरुद्ध निर्माण की अनुमति देने या रोकने में नाकाम अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।