भारत से पूर्ण युद्ध के अंदेशे ने पाकिस्तानी सेना में फैलाई थी दहशत, मुनीर को था इस्लामाबाद पर अटैक का डर
Updated on
29-12-2025 12:41 PM
इस्लामाबाद: भारत के बीच इस साल मई में हुई लड़ाई के दौरान पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व में बड़े पैमाने पर घबराहट फैल गई थी। पाकिस्तान अपने नेताओं की सुरक्षा को लेकर डरा हुआ था क्योंकि उसे संघर्ष के पूर्ण युद्ध में बदलने और भारत की ओर से ज्यादा घातक हमलों का अंदेशा था। भारत की ओर से बड़े स्तर पर हमले के डर ने रावलपिंडी और इस्लामाबाद यानी पाकिस्तानी सेना और सरकार दोनों के शीर्ष नेतृत्व में चिंता पैदा कर दी थी।
CNN-News18 ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की सेना को बड़े पैमाने पर भारतीय हमले का डर था। पाकिस्तान सेना को आशंका थी कि भारत की ओर से कुछ ठिकानों पर की गई स्ट्राइक सीमित हमले से बढ़कर मल्टी डोमेन यानी बड़े हमले में बदल सकती है। इसमें एयर स्ट्राइक के साथ खुफिया कार्रवाई और जमीन पर हमले शामिल हो सकते हैं।
बंकर में छुपने की नौबत
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल ही में खुलासा किया है कि मई में भारत से तनाव के दौरान उन्हें बंकर में जाने की सलाह दी गई थी। जरदारी ने कहा कि उनके मिलिट्री सेक्रेटरी ने उन्हें खुद आकर हालात की गंभीरता बताई थी। उसने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सेना के हमले के बाद युद्ध शुरू हो गया है।जरदारी ने कहा, 'मेरे मिलिट्री सेक्रेटरी ने मुझे युद्ध की जानकारी देते हुए सुझाव दिया कि मुझे बंकर में चले जाना चाहिए। मैंने बंकर में छिपने से मना कर दिया क्योंकि नेताओं को बंकर में नहीं मरना चाहिए बल्कि हालात का सामना करना चाहिए।' जरदारी ने यह भी कहा कि उन्होंने कई दिन पहले ही इस टकराव का अंदाजा लगा लिया था।
राष्ट्रपति की सुरक्षा
पाकस्तानी सेना का राष्ट्रपति को सुरक्षित रखने की कोशिश बताती है कि उनको किस स्तर तक चीजें पहुंचने का डर था। पाकिस्तान सेना को साफतौर पर लग रहा था कि भारतीय सेना के हमले पीओके और पंजाब के कुछ खास लक्ष्यों से आगे बढ़कर इस्लामाबाद तक आ सकते हैं। इस्लामाबाद में हमले का मतलब बड़े नेताओं की जान को खतरा था।
पाकिस्तानी सेना युद्ध के अलावा अपनी आंतरिक अस्थिरता के बारे में भी चिंतित थी। पाकिस्तान में किसी बड़े नेता की मौत से जनता में हलचल पैदा होने का डर भी असीम मुनीर के नेतृत्व वाली सेना को था। ऐसे में सेना की कोशिश थी कि राष्ट्रपति को सुरक्षित रखा जाए ताकि किसी साइबर अभियान जैसी स्थिति में उनको सामने लाया जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर
भारत की सेना ने 7 मई को तड़के पाकिस्तान के पंजाब के पीओके में नौ आतंकी शिविरों पर हमले किए थे। ये हमले 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब के तौर पर किए गए। भारत के बाद पाकिस्तान की सेना की ओर से भी अटैक किए गए। ऐसे में चार दिन तक दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति रही। 10 मई को दोनों पक्ष सीजफायर पर राजी हुए।
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